मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (हिंदी माध्यम) इयत्ता ९ वी

‘अंगदान का महत्‍त्‍व’ इस विषय पर आयोजित चर्चा में अपने विचार व्यक्‍त कीजिए । - Hindi [हिंदी]

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

‘अंगदान का महत्‍त्‍व’ इस विषय पर आयोजित चर्चा में अपने विचार व्यक्‍त कीजिए।

दीर्घउत्तर

उत्तर

अंगदान एक महादान है। इसे दूसरे शब्दों में “जीवन के लिए उपहार” भी कहते हैं। यह करके हम कई लोगो को जीवनदान दे सकते है। अंगदान किसी ऐसे व्यक्ति को अंग का दान है जिसे उसकी स्थिति और स्वास्थ्य स्थिति को बढ़ाने के लिए प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है। यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें एक जीवित या मृत व्यक्ति से एक स्वास्थ्य अंग (दाता) निकाला जाता है और उस व्यक्ति में प्रत्यारोपित किया जाता है जिसका अनाथ (रिसीवर) खराब है। अंगदान प्राप्तकर्ताओं को लंबे समय तक जीवित रहने और जीवन की उच्च गुणवत्ता प्राप्त करने की अनुमति देता है। एक प्रत्यारोपण या तो किसी व्यक्ति का जीवन बचा सकता है या बदल सकता है। नेत्र और ऊतक दान के माध्यम से, एक अंगदाता सात लोगों की जान बचा सकता है और कई लोगों को लाभान्वित कर सकता है। दाताओं और उनके परिवारों को मृत्यु के बाद अपने अंगों और ऊतकों को दान करने के लिए सहमति देनी होगी। भारत में अंगदान की दर दुनिया में सबसे कम दरों में से एक बनी हुई है। भारत में, अंगदान की दर काफी कम है, लगभग 0.3 मिलियन। आजकल हर कोई किसी न किसी रोग से ग्रस्त है। किसी का लीवर खराब है तो किसी का ह्रदय सही तरह से काम नही करता हैं। किसी के टिशू खराब हो चूका है तो किसी की आँखों की रोशनी जा चुकी है। आज पूरे विश्व में हजारो लोग सड़क व दूसरे परिवहन दुर्घटना में अपनी जान गँवा देते हैं। ऐसा कोई दिन नही होता जब लोगो की दुर्घटना में मृत्यु नही होती है। अंगो की मांग की तुलना में उसकी पूर्ति बहुत कम है। कई लोग नही चाहते कि उनके परिजनों की मृत्यु के बाद उनके अंगो को निकाला जाये। उनके मृत शरीर को चीरा फाड़ा जाये। इसके पीछे कई बार धार्मिक कारण भी होते है, पर इस तरह की सोच सही नही है। मृत्यु के बाद यदि हमारे अंगो से किसी को नई जिन्दगी मिल सकती है तो इसमें कोई गलत बात नही है। हमारी सोच हमेशा वैज्ञानिक होनी चाहिए। गलत धारणा की वजह से भारत में अंगदान का प्रतिशत बहुत कम है। आज हजारो लोग अंग न मिल पाने के कारण मर जाते हैं। ईश्वर ने हमे ऐसा अवसर दिया है कि अपनी मृत्यु के बाद भी अंगदान करके हम किसी दूसरे की मदद कर सकते हैं। अब आधुनिक चिकित्सा तकनीक हर दिन अंग प्रत्यारोपण में नई सफलता प्राप्त कर रही है। इसलिए हमे निस्वार्थ भाव से अंगदान करना चाहिए।

shaalaa.com
सींकवाली
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.02: सींकवाली - स्वाध्याय [पृष्ठ ५]

APPEARS IN

बालभारती Hindi - Kumarbharati 9 Standard Maharashtra State Board
पाठ 1.02 सींकवाली
स्वाध्याय | Q २ | पृष्ठ ५

संबंधित प्रश्‍न

‘नदी और समुद्र’ के बीच होने वाला संवाद अपने शब्‍दों में लिखिए।


किसी दिव्यांग व्यक्ति का साक्षात्कार लेने हेतु प्रश्न निर्मिति कीजिए।


पर एक दिन की बात, बच्चों ने कुछ ज्‍यादा ही चिढ़ा दिया, तो ताई अपना गुस्सा काबू नहीं कर पाईं। लाठी लेकर पीछे-पीछे दौड़ पड़ीं। पर अभी कुछ ही आगे गई थीं कि एक गड्ढ़े में उनका पैर पड़ा लाठी दूर जा गिरी और ताई बुरी तरह लड़खड़ाकर जमीन पर आ गिरीं। सिर से खून निकलने लगा। एक पैर भी बुरी तरह मुड़ गया था और ताई हाय-हाय कर रही थीं। उन्होंने खुद उठने की दो-एक बार कोशिश की, पर लाचार थीं। बच्चे दूर से यह देख रहे थे। पर पास आने की उनकी हिम्‍मत नहीं हुई। आखिर गोलू और भीमा ने किसी तरह आगे आकर उन्हें सहारा दिया और उन्हें घर के अंदर ले गए।

संजाल पूर्ण कीजिएः


पर एक दिन की बात, बच्चों ने कुछ ज्‍यादा ही चिढ़ा दिया, तो ताई अपना गुस्सा काबू नहीं कर पाईं। लाठी लेकर पीछे-पीछे दौड़ पड़ीं। पर अभी कुछ ही आगे गई थीं कि एक गड्ढ़े में उनका पैर पड़ा लाठी दूर जा गिरी और ताई बुरी तरह लड़खड़ाकर जमीन पर आ गिरीं। सिर से खून निकलने लगा। एक पैर भी बुरी तरह मुड़ गया था और ताई हाय-हाय कर रही थीं। उन्होंने खुद उठने की दो-एक बार कोशिश की, पर लाचार थीं। बच्चे दूर से यह देख रहे थे। पर पास आने की उनकी हिम्‍मत नहीं हुई। आखिर गोलू और भीमा ने किसी तरह आगे आकर उन्हें सहारा दिया और उन्हें घर के अंदर ले गए।

उत्तर लिखिए:

‘बच्चे दूर से यह देख रहे थे।’ इस वाक्‍य से होने वाला बोध


संजाल पूर्ण कीजिए:


'सींकवाली' कहानी में प्रयुक्त पात्रों के नामों की सूची बनाइए।


ताई का वात्सल्य प्रकट करने वाले वाक्य ढॅूंढ़कर लिखिए।


बच्चों से प्रेम करने वाले महापुरुषों के जीवन के कोई प्रसंग बताइए।


‘प्यार लुटाने से ही प्यार मिलता है’ इसपर अपने विचार लिखिए।


पर एक दिन की बात, बच्चों ने कुछ ज्‍यादा ही चिढ़ा दिया, तो ताई अपना गुस्सा काबू नहीं कर पाईं। लाठी लेकर पीछे-पीछे दौड़ पड़ीं। पर अभी कुछ ही आगे गई थीं कि एक गड्ढ़े में उनका पैर पड़ा लाठी दूर जा गिरी और ताई बुरी तरह लड़खड़ाकर जमीन पर आ गिरीं। सिर से खून निकलने लगा। एक पैर भी बुरी तरह मुड़ गया था और ताई हाय-हाय कर रही थीं। उन्होंने खुद उठने की दो-एक बार कोशिश की, पर लाचार थीं। बच्चे दूर से यह देख रहे थे। पर पास आने की उनकी हिम्‍मत नहीं हुई। आखिर गोलू और भीमा ने किसी तरह आगे आकर उन्हें सहारा दिया और उन्हें घर के अंदर ले गए।

परिच्छेद में आए शब्‍द युग्‍म:


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×