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प्रश्न
अपने घर के बरामदे में खड़े होकर छ: वर्षीय विश्वेश्वरैया ने क्या देखा?
उत्तर
अपने घर के बरामदे में छ: वर्षीय विश्वेश्वरैया ने देखा कि बारिश के कारण वातावरण बहुत सुंदर हो गया है। पेड़ बारिश के कारण धुल गए थे। पत्तियों और टहनियों से पानी टपक रहा था। कुछ दूरी पर धान के खेत लहलहा रहे थे। गली में नाली में पानी जलप्रपात के समान घूम रहा था। उसमें इतनी शक्ति आ गई थी कि वह बहुत बड़े पत्थर को अपने साथ बहाकर ले जा रहा था। देखा जाए, प्रकृति के ये विभिन्न रूप सामूहिक रूप से प्रकृति की शक्ति का प्रदर्शन कर रहे थे। थोड़ी दूर कहीं एक गरीब स्त्री ताड़पत्र की छतरी पकड़े बारिश में खड़ी थी। वह बहुत गरीब थी। उसे देखे विश्वेश्वरैया के मन में प्रश्न उठा की लोग गरीब क्यों होते हैं। इस तरह देखते हुए उन्होंने गरीबी और प्रकृति के विषय में बहुत कुछ जानने का प्रयास किया।
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संधिविग्रह
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नव + आगंतुक = ______ मेघाच्छन्न = ______
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रिक्त स्थान भरो -
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हाथी जैसा ______