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दो कारण बताएँ कि क्यों सिर्फ़ जाति के आधार पर भारत में चुनावी नतीजे तय नहीं हो सकते? - Social Science (सामाजिक विज्ञान)

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प्रश्न

दो कारण बताएँ कि क्यों सिर्फ़ जाति के आधार पर भारत में चुनावी नतीजे तय नहीं हो सकते?

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

भारत में जाति व्यवस्था भी धर्म की तरह चुनावों को प्रभावित करती है किंतु केवल जाति के आधार पर ही चुनावी नतीजे तय नहीं हो सकते

  1. देश के किसी भी एक संसदीय चुनाव क्षेत्र में किसी एक जाति के लोगों का बहुमत नहीं है। इसलिए हर पार्टी और । उम्मीदवार को चुनाव जीतने के लिए एक जाति और समुदाय से ज्यादा लोगों का भरोसा हासिल करना होता है।
  2. कोई भी पार्टी किसी एक जाति या समुदाय के सभी लोगों का वोट हासिल नहीं कर सकती। जब लोग किसी जाति विशेष को किसी एक पार्टी का वोट बैंक’ कहते हैं तो इसका मतलब यह होता है कि उस जाति के ज्यादातर लोग उसी पार्टी को वोट देते हैं।

इस प्रकार चुनाव में जाति की भूमिका महत्त्वपूर्ण तो होती है किंतु दूसरे कारण भी महत्त्वपूर्ण होते हैं। मतदाताओं का लगाव जाति के साथ-साथ राजनीतिक दलों से भी होता है। सरकार के काम-काज के बारे में लोगों की राय और नेताओं की लोकप्रियता का चुनावों पर निर्णायक असर होता है।

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जाति और राजनीति
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पाठ 4: जाति, धर्म और लैंगिक मसले - प्रश्नावली [पृष्ठ ५५]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Social Science (Political Science) - Democratic Politics 2 [Hindi] Class 10
पाठ 4 जाति, धर्म और लैंगिक मसले
प्रश्नावली | Q 4. | पृष्ठ ५५

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सूची I और सूची II का मेल कराएँ और नीचे दिए गए कोड के आधार पर सही जवाब खोजें।

  सूची I सूची II
1. अधिकारों और अवसरों के मामले में स्त्री और पुरुष की बराबरी मानने वाला व्यक्ति सांप्रदायिक
2. धर्म को समुदाय का मुख्य आधार मानने वाला व्यक्ति नारीवादी
3. जाति को समुदाय का मुख्य आधार मानने वाला व्यक्ति धर्मनिरपेक्ष
4. व्यक्तियों के बीच धार्मिक आस्था के आधार पर भेदभाव न करने वाला व्यक्ति जातिवादी

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