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द्विवेदी जी की भाषा-शैली पर एक अनुच्छेद लिखिए। - Hindi Course - A

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प्रश्न

द्विवेदी जी की भाषा-शैली पर एक अनुच्छेद लिखिए।

टीपा लिहा

उत्तर

द्विवेदी जी की भाषा खड़ी बोली हिंदी थी। इन्होंने खड़ी बोली हिंदी को गद्य की भाषा के रुप में प्रधानता दी। इन्होंने व्याकरण तथा वर्तनी की अशुद्धियों पर विशेष ध्यान दिया, उनकी भाषा में तत्सम शब्द अधिक होते हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक शैली का भी प्रयोग किया।

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स्त्री-शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन
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पाठ 15: महावीरप्रसाद द्विवेदी - स्त्री शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ११०]

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एनसीईआरटी Hindi - Kshitij Part 2 Class 10
पाठ 15 महावीरप्रसाद द्विवेदी - स्त्री शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन
प्रश्न-अभ्यास | Q 8 | पृष्ठ ११०

संबंधित प्रश्‍न

कुछ पुरातन पंथी लोग स्त्रियों की शिक्षा के विरोधी थे। द्विवेदी जी ने क्या-क्या तर्क देकर स्त्री-शिक्षा का समर्थन किया?


'स्त्रियों को पढ़ाने से अनर्थ होते हैं' - कुतर्कवादियों की इस दलील का खंडन द्विवेदी जी ने कैसे किया है, अपने शब्दों में लिखिए।


पुराने समय में स्त्रियों द्वारा प्राकृत भाषा में बोलना क्या उनके अपढ़ होने का सबूत है - पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।


परंपरा के उन्हीं पक्षों को स्वीकार किया जाना चाहिए जो स्त्री-पुरुष समानता को बढ़ाते हों-तर्क सहित उत्तर दीजिए।


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लेखक स्त्री-शिक्षा विरोधियों की किस सोच पर दुख प्रकट करता है?


स्त्री-शिक्षा के विरोधी अपनी बात के समर्थन में क्या-क्या तर्क देते हैं?


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लेखक ने स्त्री-शिक्षा विरोधियों पर व्यंग्य करते हुए कहा है, इस तर्कशास्त्रज्ञता और न्यायशीलता की बलिहारी! इस तर्कशास्त्रज्ञता और न्यायशीलता को स्पष्ट कीजिए।


प्राचीन भारत की किन्हीं दो विदुषी स्त्रियों का नामोल्लेख करते हुए यह भी बताइए कि उस समय स्त्रियों को कौन कौन-सी कलाएँ सीखने की अनुमति थी?


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लेखक ने स्त्री-शिक्षा के समर्थन में किस पौराणिक ग्रंथ का उल्लेख किया है? उसका कथ्य संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।


शिक्षा की व्यापकता के संदर्भ में लेखक का दृष्टिकोण स्पष्ट कीजिए।


‘स्त्री-शिक्षा के विरोधी कुतर्को का खंडन’ पाठ का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।


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