मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता १० वी

गीत में प्रयुक्‍त क्रियारूप लिखिए: बाग-बगीचे, ताल-तलैया ______ झूम-झूमकर मस्‍ती में तरु गीत ______ मधुमास आस-विश्वास ______ धरती ने ______ - Hindi - Composite [हिंदी - संयुक्त]

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

गीत में प्रयुक्‍त क्रियारूप लिखिए:

  1. बाग-बगीचे, ताल-तलैया ______
  2. झूम-झूमकर मस्‍ती में तरु गीत ______
  3. मधुमास आस-विश्वास ______
  4. धरती ने ______
रिकाम्या जागा भरा

उत्तर

  1. बाग-बगीचे, ताल-तलैया मुस्काएँ (मुस्काना)
  2. झूम-झूमकर मस्‍ती में तरु गीत सुनाएँ (सुनाना)
  3. मधुमास आस-विश्वास बढ़ाता (बढ़ाना)
  4. धरती ने शृंगार किया (करना)
shaalaa.com
सोंधी सुगंध
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.1: सोंधी सुगंध - स्‍वाध्याय [पृष्ठ २]

APPEARS IN

बालभारती Hindi (Composite) - Lokvani Class 10 Maharashtra State Board
पाठ 1.1 सोंधी सुगंध
स्‍वाध्याय | Q (३) | पृष्ठ २

संबंधित प्रश्‍न

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

सोंधी-सोंधी-सी सुगंध, माटी से बोली,
बादल बरस गया, धरती ने आँखें खोलीं।

चारों ओर हुई हरियाली कहे मयूरा,
सदियों का जो सपना है हो जाए पूरा।
एक यहाँ पर नहीं अकेला, होगी टोली,
सोंधी-सोंधी-सी सुगंध, माटी से बोली।।

बाग-बगीचे, ताल-तलैया सब मुस्काएँ,
झूम-झूमकर मस्ती में तरु गीत सुनाएँ।
मस्त पवन ने अब खोली है अपनी झोली,
सोंधी-सोंधी-सी सुगंध, माटी से बोली।।

(1) संजाल पूर्ण कीजिए:  (2)

(2) पदयांश को अंतिम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।  (2)


निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

चारों ओर हुई हरियाली कहे मयूरा, सदियों का जो सपना है हो जाए पूरा।
एक यहाँ पर नहीं अकेला, होगी टोली, सोंधी-सोंधी सी सुगंध, माटी से बोली।।
बाग-बगीचे, ताल-तलैया, सब मुस्काएँ, झूम-झूमकर मस्ती में तरु गीत सुनाएँ।

(1) उचित जोड़ियाँ मिलाइए- (अपने पद के अनुसार)  (2)

उत्तर
अकेला ______ मुस्काएँ
सोंधी-सोंधी ______ टोली
बाग-बगीचे ______ गीत
झूम-झूमकर ______ माटी

(2) पहली दो पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।  (2)


कृति पूर्ण कीजिए:


कृति पूर्ण कीजिए:


प्रस्तुत गीत की प्रथम चार पंक्तियों का भावार्थ लिखिए।

सोंधी-सोंधी-सी सुगंध, माटी से बोली,
बादल बरस गया, धरती ने आँखें खोलीं।
चारों ओर हुई हरियाली कहे मयूरा,
सदियों का जो सपना है हो जाए पूरा। 

Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×