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प्रश्न
इलेक्ट्रॉनस्नेही तथा नाभिकस्नेही क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर
नाभिकस्नेही और इलेक्ट्रॉनस्नेही (Nucleophiles and Electrophiles) - इलेक्ट्रॉन-युग्म प्रदान करने वाला अभिकर्मक को ‘नाभिकस्नेही’ (nucleophile, Nu : ) अर्थात् ‘नाभिक खोजने वाला’ कहलाता है तथा अभिक्रिया ‘नाभिकस्नेही अभिक्रिया’ (nucleophilic reaction) कहलाती है। इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने वाले अभिकर्मक को इलेक्ट्रॉनस्नेही (electrophile E+), अर्थात् ‘इलेक्ट्रॉन चाहने वाला’ कहते हैं और अभिक्रिया ‘इलेक्ट्रॉनस्नेही अभिक्रिया’ (electrophilic reaction) कहलाती है।
ध्रुवीय कार्बनिक अभिक्रियाओं में क्रियाधारक के इलेक्ट्रॉनस्नेही केंद्र पर नाभिकस्नेही आक्रमण करता है। यह क्रियाधारक का विशिष्ट परमाणु अथवा इलेक्ट्रॉन न्यून भाग होता है। इसी प्रकार क्रियाधारकों के इलेक्ट्रॉनधनी नाभिकस्नेही केंद्र पर इलेक्ट्रॉनस्नेही आक्रमण करता है। अतः आबंधन अन्योन्यक्रिया के फलस्वरूप इलेक्ट्रॉनस्नेही से इलेक्ट्रॉन-युग्म प्राप्त करता है। नाभिकस्नेही से इलेक्ट्रॉनस्नेही की ओर इलेक्ट्रॉनों का संचलन वक्र तीर द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। नाभिकस्नेही के उदाहरणों में हाइड्रॉक्साइड (OH–), सायनाइड आयन (CN–) तथा कार्बऋणायन \[\ce{(R3C^-:)}\] कुछ आयन सम्मिलित हैं। इसके अतिरिक्त कुछ उदासीन अणु, (जैसे- \[\ce{H2\overset{\bullet\bullet}{O}:, R3\overset{\bullet\bullet}{N}, R2\overset{\bullet\bullet}{O}:}\] आदि) भी एकाकी इलेक्ट्रॉन-युग्म की उपस्थिति के कारण नाभिकस्नेही की भाँति कार्य करते हैं। इलेक्ट्रॉनस्नेही के उदाहरणों में कार्बधनायन \[\ce{(\overset{+}{C}H3)}\] और कार्बोनिल समूह \[\begin{array}{cc}
\backslash\phantom{........}\\
\ce{(C = O)}\\
/\phantom{.......}\\
\end{array}\] अथवा ऐल्किल हैलाइड (R3C – X, X = हैलोजेन परमाणु) वाले उदासीन अणु सम्मिलित हैं। कार्बधनायन का कार्बन केवल षष्टक होने के कारण इलेक्ट्रॉन-न्यून होता है तथा नाभिकस्नेही से इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्रहण कर सकता है। ऐल्किल हैलाइड का कार्बन आबंध ध्रुवता के कारण इलेक्ट्रॉनस्नेही केंद्र बन जाता है जिस पर नाभिकस्नेही आक्रमण कर सकता है।