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क्षेत्रवाद क्या होता है? आमतौर पर यह किन कारकों पर आधारित होता है? - Sociology (समाजशास्त्र)

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प्रश्न

क्षेत्रवाद क्या होता है? आमतौर पर यह किन कारकों पर आधारित होता है?

दीर्घउत्तर

उत्तर

  • भारत में क्षेत्रवाद की जड़े यहाँ की विविध भाषाओं, संस्कृतियों-जनजातियों तथा विविध धर्मों पर आधारित हैं।
  • इस तरह के विशेष क्षेत्रों को उनके पहचान चिह्नों की भौगोलिक संकेंद्रण के कारण भी प्रोत्साहन मिलता है तथा क्षेत्रीय वंचने का भाव आग में घी का काम करता है।
  • भारत का बँटवारा इस प्रकार के क्षेत्रवाद को संरक्षण प्रदान करने का एक माध्यम रहा है। ‘प्रेसीडेंसी’ से राज्य तक का सफर
  • स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी प्रारंभ में भारतीय राज्यों में ब्रिटिश-भारतीय व्यवस्था ही बनी रही। इसके अंसर्गत भारत बड़े-बड़े प्रांतों, जिन्हें, ‘प्रेसीडेंसी’ कहा जाता था, बँटा हुआ था। भारत में उस समय तीन बड़ी प्रेसीडेंसियाँ-मद्रास, बंबई तथा कलकत्ता थीं।
  • स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद तथा संविधान को अंगीकार किए जाने के पश्चात् औपनिवेशिक काल की इन सभी इकाइयों को तीव्र लोक आंदोलनों के कारण भारतीय संघ के भीतर नृजातीय-भाषाई राज्यों के रूप में पुनर्गठित करना पड़ा।
  • धर्म के बजाय भाषा ने क्षेत्रीय तथा जनजातीय पहचान के साथ मिलकर भारत में नृजातीय राष्ट्रीय पहचान बनाने के लिए अत्यंत व्यस्त माध्यम का काम किया है?
  • किंतु इसका मतलब यह नहीं है कि सभी भाषाई समुदायों को पृथक राज्य प्राप्त हो गया। उदाहरण के तौर पर तीन राज्यों-छत्तीसगढ़, उत्तरांचल तथा झारखंड के निर्माण को देखा जा सकता है। इन राज्यों के निर्माण में भाषा की कोई भूमिका नहीं थी। इनकी स्थापना के पीछे जनजातीय पहचान, भाषा, क्षेत्रीय वंचन तथा परिस्थिति पर आधारित नृजातीयता की प्रमुख भूमिका थी।
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भारतीय संदर्भ में क्षेत्रवाद
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पाठ 6: सांस्कृतिक विविधता की चुनौतियाँ - प्रश्नावली [पृष्ठ १४७]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Sociology [Hindi] Class 12
पाठ 6 सांस्कृतिक विविधता की चुनौतियाँ
प्रश्नावली | Q 5. | पृष्ठ १४७
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