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प्रश्न
नीचे दो तरह की राय लिखी गई है:
- विस्मय - रियासतों को भारतय संघ में मिलाने से इन रियासतों की प्रजा लोकतंत्र का विस्तार हुआ।
- इंद्रप्रीत - यह बात मैं दावे के साथ नहीं कह सकता। इसमें बल प्रयोग भी हुआ था जबकि लोकतंत्र में आम सहमति से काम किया जाता है।
देसी रियासतों के विलय और ऊपर के मुहावरे के आलोक में इस घटनाक्रम पर आपकी क्या राय है?
उत्तर
- विस्मय की राय से मैं सहमत हूं। देसी रियासतों का विलय प्राय: लोकतांत्रिक तरीके से हुआ क्योंकि सिर्फ चार - पाँच रजवाडों को छोड़कर सभी स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व वहीं भारतीय संघ में शामिल हो चुके थे। जो राजवाड़े बचे थे इनमें से भी शासक जनमत और जनता की भावनाओं (जिनकी संख्या 90% से भी ज्यादा थी) की अनदेखी कर रहे थे। सभी रियासतों के केंद्रीय सरकार द्वारा भेजे गए सहमति पत्र और हस्ताक्षर कर दिए थे। विलय से पूर्व अधिकार रजवाड़ो में शासन अलोकतांत्रिक रीती से चलाया जा रहा था और राजवाड़ों के शासक अपनी प्रजा को लोकतांत्रिक अधिकार देने के लिए तैयार नहीं थे।
- इंद्रप्रीत की राय से भी में कुछ हद तक सहमत हूं। यह राय ठीक है कि भारत में रजवाड़ों के विलय को लेकर बल प्रयोग किया गया लेकिन यह चंद राजवाड़ों हैदराबाद और जूनागढ़ के मामलों में हुआ। वह भी इसीलिए क्योंकि दोनों राजवाड़ों के शासक मुसलमान थे लेकिन वहां की जनसंख्या का लगभग 80 से 90% भाग हिंदू थी। वहां की आम जनता भारत में विलय चाहती थी। इन दोनों राजवाड़ों में आम जनता द्वारा आंदोलन भी चलाया गया। इसके अतिरिक्त भौगोलिक दृष्टि से दोनों राजवाड़े भारतीय सीमा के अधिक नजदीक थे। कश्मीर पर हमला पाकिस्तान के उकसाने पर कबालियों ने किया था। उनके नव स्वतंत्र जम्मू कश्मीर का संरक्षण करना भारत का दायित्व भी था और भारत ने वहां के शासक और जनप्रतिनिधियों की मांग पर ही सेना भेजी थी। वहां के शासक तथा आम जनता की इच्छा अनुसार कश्मीर का विलय भारत में हुआ भारत में विलय के बाद से वहाँ अनेक विधान सभा और लोक सभा चुनाव हो चुके हैं।
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