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प्रश्न
निम्न सारिणी पूर्ण कीजिए।
मंदिर स्थापत्य शैली | नागर | द्राविड़ | हेमाड़पंती |
विशेषताएँ | |||
उदाहरण |
तक्ता
उत्तर
मंदिर स्थापत्य शैली | नागर | द्राविड़ | हेमाड़पंती |
विशेषताएँ |
(१) क्रमश: छोटे होते जाते शिखरों की प्रकृतियाँ ऊपर तक रची होती हैं। | (१) मंदिरों के शिखर पिरामिड के आकार के होते हैं। | (१) इस शैली के मंदिरों की बनावट वर्गाकार तथा तारकाकृति होती है। |
(२) शिखरों की रचना नीचे से ऊपरी छोर तक खंडित होती है। | (२) शिखरों की अपेक्षा गोपुर (मुख्य प्रवेशद्वार) बड़ा तथा भव्य होता है। | (२) मंदिर की बनावट में चूने अथवा मिट्टी का उपयोग नहीं दिखाई देता। | |
(३) शिखर की मोटाई क्रमशः कम होती जाती है। | (३) उस पर पौराणिक कथा चित्र उकेरे होते हैं। | ||
(४) शिखर कलाकार होता है। | |||
उदाहरण |
(१) कंडारिया महादेव मंदिर, खजुराहो। | (१) मदुरई का मीनाक्षी मंदिर। | (१) सिन्नर का गोंदेश्वर मंदिर। |
(२) भुवनेश्वर का लिंगराज मंदिर। | (२) महाबलीपुरम का रथ मंदिर। | (२) अमरनाथ का शिव मंदिर (अंब्रेश्वर)। | |
(३) कोणार्क का सूर्य मंदिर। | (३) तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर। | (३) खिद्रापुर का कोपेश्वर मंदिर। | |
(४) राजस्थान के आबू पहाड़ पर स्थित दिलवाड़ा मंदिर। | (४) तिरुपति मंदिर। | (४) हिंगोली जिले का औंढा नागनाथ मंदिर। |
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भारत की दृश्य कला परंपरा
या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
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