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निम्नलिखित अवतरण को पढ़ें और इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए: गुटनिरपेक्ष का व्यापक अर्थ है अपने को किसी भी सैन्य गुट में शामिल नहीं करना इसका अर्थ होता है - Political Science (राजनीति विज्ञान)

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प्रश्न

निम्नलिखित अवतरण को पढ़ें और इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

गुटनिरपेक्ष का व्यापक अर्थ है अपने को किसी भी सैन्य गुट में शामिल नहीं करना इसका अर्थ होता है चीजों को यथासंभव सैन्य दृष्टिकोण से न देखना और इसकी कभी जरूरत आन पड़े तब भी किसी सैन्य गुट के नज़रिए को अपनाने की जगह स्वतंत्र रूप से स्थिति पर विचार करना तथा सभी देशों के साथ रिश्ते कायम करना

- जवाहरलाल नेहरू

  1. नेहरू सैन्य गुटों से दुरी क्यों बनाना चाहतें थे?
  2. क्या आप मानते हैं की भारत - सोवियत मैत्री की संधि से गुटनिरपेक्ष के सिद्धांतों का उललंघन हुआ? अपने उत्तर के समर्थन में तर्क दीजिए।
  3. अगर सैन्य - गुट न होते तो क्या गुटनिरपेक्षता की निति बेमानी होती?
थोडक्यात उत्तर

उत्तर

  1. नेहरू सैन्य गुटों से निम्नलिखित कारणों से दुरी बनाना चाहते थे
    a. वह देश में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करना चाहते थे। यह यकीन अमेरिका सहित सभी लोकतंत्रिक देशों को दिलाना चाहते थे।
    b. वह गुट - निरपेक्षता की बात करके अमेरिका और सोवियत संघ दोनों के खेमों में सम्मिलित राष्ट्रों से भारत के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता पाकर तीव्र गति से आर्थिक विकास करना चाहते थे। यह एक और भांखड़ा नांगल जैसे विशाल बाँध, बहुउद्देशीय परियोजनाएँ बनाना चाहते थे तो दूसरी ओर भिलाई, राउलकेला आदि विशाल लौह - इस्पात के कारखानों लगाकर देश के औद्योगिक आधार को सुदृढ़ता देना चाहते थे।
    c. उन्होंने नियोजन, सहकारी कृषि, भूमि सुधार, चकयंदी, जमींदारी उन्मूलन आदि वामपंथी कार्यक्रम लागू करके सोवियत संघ और साम्यवादी देशों में भारत की छवि को निखारा और ऐसा ही चाहते थे।
  2. हमारे विचारनुसार भारत - सोवियत मैत्री संधि से गुटनिरपेक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ क्योंकि खुले तौर पर भारत सैद्धांतिक रूप से सोवियत संघ की तरफ झुक गया जिसका उल्लेख चीन, पाकिस्तान, और भारत के विरोधी राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर करते हैं। कांग्रेस सरकार के विरोधी नेता और अमरीका समर्थक राजनैतिक दल भी ऐसा ही चाहते थे।
  3. हमारे विचरनुसार सैन्य गुट निरपेक्षता की निति के जनक थे। जब गुट ही नहीं होते तो निर्गुटता का प्रश्न ही नहीं उठता। निप्पक्ष मूल्यांकन हमारे ह्रदय और आत्मा को कहने के लिए विवश करता है की गुटनिरपेक्षता तभी पैदा हुई जब विश्व में सैन्य गुट रहे। 1990 के बाद ही गुटनिरपेक्षता के अस्तित्व के औचित्य को लेकर प्रश्न खड़े हुए हैं, उससे पहले नहीं।
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गुटनिरपेक्षता की नीति
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 4: भारत के विदेश संबंध - प्रश्नावली [पृष्ठ ८१]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Political Science [Hindi] Class 12
पाठ 4 भारत के विदेश संबंध
प्रश्नावली | Q 10. | पृष्ठ ८१

संबंधित प्रश्‍न

इस बयान के आगे सही या गलत का निशान लगाएँ:

गुटनिरपेक्षता की निति अपनाने के कारण भारत, सोवियत संघ और संयुक्त राज्य अमरीका, दोनों की सहायता हासिल कर सका।


इस बयान के आगे सही या गलत का निशान लगाएँ:

अपने पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंध शुरुआत से ही तनावपूर्ण रहे।


निम्नलिखित का सही जोड़ा मिलाएँ:

(क) 1950 - 64 के दौरान भारत की विदेश निति का लक्ष्य (i) तिब्बत के धार्मिक नेता जो सीमा पार कर के भारत चले आए।
(ख) पंचशील (ii) क्षेत्रीय अंखडता और संप्रभुता की रक्षा तथा आर्थिक विकास।
(ग) बांडुंग सम्मेलन (iii) शांतिपूर्ण सह - अस्तित्व के पाँच सिद्धांत।
(घ) दलाई लामा (iv) इसकी परिणति गुटनिरपेक्ष आंदोलन में हुई।

नेहरू विदेश निति के संचालन को स्वतंत्रता का एक अनिवार्य संकेतक क्यों मानते थे? अपने उत्तर में दो कारण बताएँ और उनके पक्ष में उदाहरण भी दें।


अगर आपको भारत की विदेश निति के बारे में फैसला लेने को कहा जाए तो आप इसकी किन दो बातों को बदलना चाहेंगे। ठीक इसी तरह यह भी बताएँ की भारत की विदेश निति के किन दो पहलुओं को आप बरकरार रखना चाहेंगे। अपने उत्तर के समर्थन में तर्क दीजिए।


किस राष्ट्र का राजनीतिक नेतृत्व किस तरह उस राष्ट्र की विदेश निति पर असर डालता है? भारत की विदेश निति के उदाहरण देते हुए इस प्रश्न पर विचार कीजिए।


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