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निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए। आदमी दशाश्वमेध पर जाता है और पाता है घाट का आखिरी पत्थर कुछ और मुलायम हो गया है - Hindi (Elective)

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प्रश्न

निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।

आदमी दशाश्वमेध पर जाता है

और पाता है घाट का आखिरी पत्थर कुछ और मुलायम हो गया है

सीढ़ियों पर बैठे बंदरों की आँखों में

एक अजीब-सी नमी है

और एक अजीब सी चमक से भर उठा है भिखारियों के कटोरों का निचाट खालीपन

तुमने कभी देखा है

खाली कटोरों में वसंत का उतरना!

यह शहर इसी तरह खुलता है

इसी तरह भरता

और खाली होता है यह शहर

व्याख्या

उत्तर

संदर्भ:

यह काव्यांश केदारनाथ सिंह की कविता 'बनारस' से लिया गया है। कवि ने इस कविता में बनारस शहर और उसके घाटों के माध्यम से जीवन के उतार-चढ़ाव, परिवर्तन और मानवीय भावनाओं को गहराई से उत्कीर्ण किया है।

प्रसंग:

कविता में कवि ने बनारस शहर के दशाश्वमेध घाट की छवि प्रस्तुत की है। वह घाट की सामान्य चीज़ों पत्थरों, बंदरों, और भिखारियों के कटोरों के माध्यम से जीवन में परिवर्तन और संवेदनाओं के उदय को दर्शाता है। यह काव्यांश इस बात पर प्रकाश डालता है कि जीवन भले ही एक साधारण और स्थिर प्रतीत हो, लेकिन उसमें भी सूक्ष्म स्तर पर निरंतर परिवर्तन होता रहता है।

व्याख्या:

कवि कहता है कि दशाश्वमेध घाट पर जाकर मनुष्य को ऐसा महसूस होता है कि कठोर पत्थर भी अब नरम होने लगे हैं, मानो समय ने उन्हें संवेदनशील बना दिया हो। सीढ़ियों पर बैठे बंदरों की आँखों में अजीब-सी नमी दिखती है, जो जीवन में छुपी हुई उदासी और संवेदना का प्रतीक है। भिखारियों के कटोरे, जो अब तक खाली थे, उनमें एक अजीब-सी चमक आ गई है। कवि प्रतीकात्मक रूप से पूछता है क्या कभी किसी ने खाली कटोरों में वसंत को उतरते देखा है? यहाँ 'वसंत' नई उम्मीद और जीवन की ताजगी का प्रतीक है।

कवि यह दिखाना चाहता है कि बनारस जैसा शहर हमेशा भरता, खाली होता और फिर खुलता है, ठीक उसी तरह जैसे जीवन चलता रहता है समय के साथ बदलते हुए, फिर भी स्थायी प्रतीत होता है।

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