अतः, दिए गए यौगिकों की क्षारीयता के बढ़ते क्रम को निम्नलिखित प्रकार से लिखा जा सकता है:
C6H5NH2 < C6H5N(CH3)2 < CH3NH2 < (C2H5)2NH
निम्नलिखित को क्रम में लिखिए।
क्षारकीय प्राबल्य के घटते क्रम में –
C6H5NH2, C6H5N(CH3)2, (C2H5)2NH एवं CH3NH2
C6H5N(CH3)2, C6H5NH2 की तुलना में अधिक क्षारीय होता है क्योंकि C6H5N(CH3)2 में दो −CH3 समूह उपस्थित होते हैं, जो +I (धनात्मक प्रेरक) प्रभाव दिखाते हैं। दूसरी ओर, CH3NH2 में केवल एक −CH3 समूह होता है जबकि (C2H5)2NH में दो −C2H5 समूह होते हैं। इसलिए, (C2H5)2NH की क्षारीयता, CH3NH2 की तुलना में अधिक होती है।
अब, −C6H5 समूह के −R प्रभाव के कारण C6H5N(CH3)2 CH3NH2 से कम क्षारीय है।
अतः, दिए गए यौगिकों की क्षारीयता के बढ़ते क्रम को निम्नलिखित प्रकार से लिखा जा सकता है:
C6H5NH2 < C6H5N(CH3)2 < CH3NH2 < (C2H5)2NH
अणुसूत्र C3H9N से प्राप्त विभिन्न समावयवों की संरचना लिखिए। उन समावयवों के आईयूपीएसी नाम लिखिए जो नाइट्रस अम्ल के साथ नाइट्रोजन गैस मुक्त करते हैं।
निम्नलिखित युगल का यौगिकों में विभेद के लिए एक रासायनिक परीक्षण दीजिए।
मेथिलऐमीन एवं डाइमेथिलऐमीन
निम्नलिखित के कारण बताइए।
मेथिलऐमीन फेरिक क्लोराइड के साथ जल में अभिक्रिया करने पर जलयोजित फेरिक ऑक्साइड का अवक्षेप देता है।
निम्नलिखित के कारण बताइए।
यद्यपि ऐमीनों समूह इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं में आर्थो एवं पैरा निर्देशक होता है, फिर भी ऐनिलीन नाइट्रीकरण द्वारा यथेष्ट मात्रा में मेटानाइट्रोऐनिलीन देती है।
निम्नलिखित के कारण बताइए।
ऐनिलीन फ्रिडेल क्राफ्ट्स अभिक्रिया प्रदर्शित नहीं करती।
प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों की पहचान की विधि का वर्णन कीजिए। इन अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण भी लिखिए।
निम्न परिवर्तन निष्पादित कीजिए।
क्लोरोबेन्ज़ीन से p-क्लोरोऐनिलीन
निम्न परिवर्तन निष्पादित कीजिए।
ऐनिलीन से p-ब्रोमोऐनिलीन
निम्नलिखित अभिक्रिया को पूर्ण कीजिए।
\[\ce{C6H5NH2 + (CH3CO)2O ->}\]
निम्नलिखित का संभावित कारण बताइए।
ऐरोमैटिक ऐमीनों की तुलना में ऐलीफैटिक ऐमीनों प्रबल क्षारक होते हैं।