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प्रश्न
निम्नलिखित पंक्तियों में निहित काव्य सौंदर्य लिखिए।
पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढ़े।
नीरज नयन नेह जल बाढ़े॥
कहब मोर मुनिनाथ निबाहा।
एहि ते अधिक कहौं मैं काहा॥
उत्तर
भाव-सौंदर्य: इस चौपाई में तुलसीदास जी ने भरत की मनोदशा का मार्मिक चित्रण किया है जब वह मुनि वसिष्ट के अनुरोध पर अपने मन की बात कहने के लिए श्री राम के सामने खड़े होते हैं तो उनका शरीर पुलकित हो जाता है। इससे भरत की भावुकता का ज्ञान होता है। उनकी आँखों से आँसुओं की धारा बह निकलती है।उनके मुँह से बोल निकलने बड़े कठिन प्रतीत हो रहे हैं, फिर भी वे बोलते हैं कि मैं इससे अधिक क्या कह सकता हूँ। मुनि वसिष्ट ने पहले से ही कह दिया है श्री राम के स्नेह और प्रेम के कारण वे भावविभोर हो जाते हैं।
शिल्प सौंदर्य:
- ‘नीरज नयन नेह’ और ‘मोर मुनिनाथ’ में अनुप्रास अलंकार है।
- ‘नीरज नयन’, ‘नेह जल’ में रूपक अलंकार है।
- अवधी भाषा का प्रयोग है।
- चौपाई छंद है।
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निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए -
पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढ़े। नीरज नयन नेह जल बाढ़े॥ कहब मोर मुनिनाथ निबाहा। एहि तें अधिक कहौं मैं काहा॥ मैं जानउँ निज नाथ सुभाऊ। अपराधिहु पर कोह न काऊ॥ मो पर कृपा सनेहू बिसेखी। खेलत खुनिस न कबहूँ देखी॥ |
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