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प्रश्न
निम्नलिखित विषय पर दिए गए संकेत-बिन्दुओं के आधार पर लगभग 120 शब्दों में एक अनुच्छेद लिखिए:
पर सेवा का सुख
संकेत-बिंदु:
- पर सेवा से अभिप्राय
- पर सेवा से प्राप्त अनुभव
- मानव जीवन की कृतार्थता
उत्तर
पर सेवा का सुख
पर सेवा का अर्थ है - निस्वार्थ भाव से दूसरों की सहायता करना। यह केवल दान देना या भौतिक सहायता प्रदान करना ही नहीं, बल्कि किसी के दुःख-दर्द को समझकर उसे स्नेह, सहयोग और सांत्वना देना भी परोपकार का एक रूप है। पर सेवा का वास्तविक सुख तब प्राप्त होता है जब हम बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की भलाई के लिए कार्य करते हैं।
जब हम किसी जरूरतमंद की सहायता करते हैं, तो हमारे हृदय में असीम शांति और संतोष की अनुभूति होती है। किसी भूखे को भोजन कराना, किसी निराश व्यक्ति को प्रोत्साहित करना, वृद्धजनों की सेवा करना या अशिक्षितों को शिक्षा देना - ये सभी पर सेवा के रूप हैं, जो हमारे जीवन को सार्थक बनाते हैं।
मानव जीवन की कृतार्थता परोपकार में निहित है। यदि हमारा जीवन केवल अपने लाभ तक सीमित रह जाए, तो उसका कोई विशेष मूल्य नहीं रहता। सच्ची खुशी तब मिलती है जब हम दूसरों के चेहरे पर मुस्कान ला सकें। भारतीय संस्कृति में भी "परहित सरिस धरम नहिं भाई" कहकर परोपकार को सबसे बड़ा धर्म माना गया है। इसलिए, हमें निस्वार्थ सेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बनाना चाहिए, क्योंकि यही सच्चे आनंद और संतोष का मार्ग है।