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प्रश्न
"निसर्ग वैभव" कविता का रचना बोध लिखिए।
उत्तर
प्रस्तुत कविता में प्राकृतिक सौंदर्य की भव्यता, निसर्ग की उदात्त अनुभूतियाँ, आध्यात्मिक मूल्य, भाषा का प्रभावशाली उपयोग और वर्णनात्मक शैली का दर्शन होता है। कविता पेड़ों, पहाड़ों, हवाओं, सूरज, तारों और पक्षियों की खूबसूरती को बेहद आकर्षक तरीके से पेश करती है। साथ ही, कवि ने मानव स्वभाव में आवश्यक परिवर्तनों और मनुष्य के बदलते चरित्र पर भी अपने विचार साझा किए हैं।
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संबंधित प्रश्न
संजाल पूर्ण कीजिए:
कविता (निसर्ग वैभव) की पंक्तियों को उचित क्रमानुसार लिखकर प्रवाह तख्ता पूर्ण कीजिए:
(१) परिचित मरकत आँगन में !
(२) अभिशापित हो उसका जीवन ?
(३) अनिल स्पर्श से पुलकित तृणदल,
(४) निश्चल तरंग-सी स्तंभित !
कविता (निसर्ग वैभव) द्वारा प्राप्त संदेश लिखिए।
कविता (निसर्ग वैभव) के तृतीय चरण का भावार्थ सरल हिंदी में लिखिए।
फूलों की ज्वालाएँ
आँखें करतीं शीतल,
मुकुल अधर मधु पीते
गुंजन भर मधुकर दल !
तितली उड़तीं,
दूर, कहीं पल्लव छाया में
रुक-रुक गाती वन प्रिय कोयल !