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महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता ९ वी

कविता (निसर्ग वैभव) के तृतीय चरण का भावार्थ सरल हिंदी में लिखिए। फूलों की ज्वालाएँ आँखें करतीं शीतल,मुकुल अधर मधु पीतेगुंजन भर मधुकर दल ! तितली उड़तीं, दूर, कहीं पल्लव छाया में - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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प्रश्न

कविता (निसर्ग वैभव) के तृतीय चरण का भावार्थ सरल हिंदी में लिखिए।

फूलों की ज्वालाएँ
आँखें करतीं शीतल,
मुकुल अधर मधु पीते
गुंजन भर मधुकर दल !
तितली उड़तीं,
दूर, कहीं पल्लव छाया में
रुक-रुक गाती वन प्रिय कोयल !

टीपा लिहा

उत्तर

रंगीन फूल आँखों के लिए ठंडक प्रदान करते हैं। मधुमक्खियाँ फूलों की कलियों से रस चूसती हैं, जबकि तितलियाँ उनके चारों ओर मंडराती हैं। एक दूर के जंगल में, एक पेड़ पर बैठी कोयल नई पत्तियों की छाया में बैठकर समय-समय पर अपनी मीठी आवाज में गाना गाती है।

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निसर्ग वैभव
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पाठ 2.06: निसर्ग वैभव (पूरक पठन) - पाठ के आँगन में [पृष्ठ ६३]

APPEARS IN

बालभारती Hindi - Lokbharati 9 Standard Maharashtra State Board
पाठ 2.06 निसर्ग वैभव (पूरक पठन)
पाठ के आँगन में | Q (३) | पृष्ठ ६३
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