Advertisements
Advertisements
Question
कविता (निसर्ग वैभव) के तृतीय चरण का भावार्थ सरल हिंदी में लिखिए।
फूलों की ज्वालाएँ
आँखें करतीं शीतल,
मुकुल अधर मधु पीते
गुंजन भर मधुकर दल !
तितली उड़तीं,
दूर, कहीं पल्लव छाया में
रुक-रुक गाती वन प्रिय कोयल !
Short Note
Solution
रंगीन फूल आँखों के लिए ठंडक प्रदान करते हैं। मधुमक्खियाँ फूलों की कलियों से रस चूसती हैं, जबकि तितलियाँ उनके चारों ओर मंडराती हैं। एक दूर के जंगल में, एक पेड़ पर बैठी कोयल नई पत्तियों की छाया में बैठकर समय-समय पर अपनी मीठी आवाज में गाना गाती है।
shaalaa.com
निसर्ग वैभव
Is there an error in this question or solution?
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
संजाल पूर्ण कीजिए:
कविता (निसर्ग वैभव) की पंक्तियों को उचित क्रमानुसार लिखकर प्रवाह तख्ता पूर्ण कीजिए:
(१) परिचित मरकत आँगन में !
(२) अभिशापित हो उसका जीवन ?
(३) अनिल स्पर्श से पुलकित तृणदल,
(४) निश्चल तरंग-सी स्तंभित !
कविता (निसर्ग वैभव) द्वारा प्राप्त संदेश लिखिए।
"निसर्ग वैभव" कविता का रचना बोध लिखिए।