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Question
कविता (निसर्ग वैभव) द्वारा प्राप्त संदेश लिखिए।
Solution
कविता में प्रकृति की मोहक सुंदरता का बहुत ही आकर्षक ढंग से वर्णन किया गया है। इसमें यह दिखाया गया है कि किस तरह से इस धरती पर मौजूद सभी पेड़-पौधे, पहाड़, फूल-फल, झरने और जानवर खुशी से नाच रहे हैं, जबकि मानव जीवन संघर्ष और दिक्कतों से घिरा हुआ है, जिसका जिम्मेदार खुद मनुष्य है क्योंकि वह स्वयं तक ही केंद्रित हो गया है। मनुष्य अपने स्वार्थ में दुनिया के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भूल रहा है। इसलिए मनुष्य के मन की परख करना और उसे विश्व के प्रति प्रेम करने और अपने कर्तव्यों का एहसास कराना अनिवार्य है।
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संजाल पूर्ण कीजिए:
कविता (निसर्ग वैभव) की पंक्तियों को उचित क्रमानुसार लिखकर प्रवाह तख्ता पूर्ण कीजिए:
(१) परिचित मरकत आँगन में !
(२) अभिशापित हो उसका जीवन ?
(३) अनिल स्पर्श से पुलकित तृणदल,
(४) निश्चल तरंग-सी स्तंभित !
कविता (निसर्ग वैभव) के तृतीय चरण का भावार्थ सरल हिंदी में लिखिए।
फूलों की ज्वालाएँ
आँखें करतीं शीतल,
मुकुल अधर मधु पीते
गुंजन भर मधुकर दल !
तितली उड़तीं,
दूर, कहीं पल्लव छाया में
रुक-रुक गाती वन प्रिय कोयल !
"निसर्ग वैभव" कविता का रचना बोध लिखिए।