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Question
कविता (निसर्ग वैभव) की पंक्तियों को उचित क्रमानुसार लिखकर प्रवाह तख्ता पूर्ण कीजिए:
(१) परिचित मरकत आँगन में !
(२) अभिशापित हो उसका जीवन ?
(३) अनिल स्पर्श से पुलकित तृणदल,
(४) निश्चल तरंग-सी स्तंभित !
Chart
Solution
shaalaa.com
निसर्ग वैभव
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संजाल पूर्ण कीजिए:
कविता (निसर्ग वैभव) द्वारा प्राप्त संदेश लिखिए।
कविता (निसर्ग वैभव) के तृतीय चरण का भावार्थ सरल हिंदी में लिखिए।
फूलों की ज्वालाएँ
आँखें करतीं शीतल,
मुकुल अधर मधु पीते
गुंजन भर मधुकर दल !
तितली उड़तीं,
दूर, कहीं पल्लव छाया में
रुक-रुक गाती वन प्रिय कोयल !
"निसर्ग वैभव" कविता का रचना बोध लिखिए।