मराठी

पावस ऋतु थी, पर्वत प्रदेश, पल-पल परिवर्तित प्रकृति-वेश। मेखलाकार पर्वत अपार अपने सहस्र दृग-सुमन फाड़, अवलोक रहा है बार-बार नीचे जल में निज महाकार, जिसके चरणों में पला ताल दर्पण-सा - Hindi Course - B

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कीजिए:

पावस ऋतु थी, पर्वत प्रदेश,
पल-पल परिवर्तित प्रकृति-वेश।

मेखलाकार पर्वत अपार
अपने सहस्र दृग-सुमन फाड़,
अवलोक रहा है बार-बार
नीचे जल में निज महाकार,

जिसके चरणों में पला ताल
दर्पण-सा फैला है विशाल!

  1. 'पल-पल परिवर्तित प्रकृति-वेश' पंक्ति का अभिप्राय है:     [1]
    1. प्रकृति अपनी वेशभूषा बार-बार बदल रही है।
    2. पर्वतों पर बादल बार-बार रूप बदल रहे हैं।
    3. प्रकृति का रूप सौंदर्य पल-पल नए रूप धारण कर रहा है।
    4. बादल बार-बार प्रकृति को नया रूप प्रदान कर रहे हैं ।
  2. पर्वतों की आँखें किसे कहा गया है?    [1]
    1. दर्पण को
    2. ताल को
    3. पुष्पों को
    4. मेखला को
  3. तालाब की समानता दर्पण से किस आधार पर की गई है?    [1]
    1. रूपाकार
    2. चमक
    3. पारदर्शिता
    4. स्वच्छता
  4. पर्वत ताल में क्या देख रहा है?   [1]
    1. आकाश का प्रतिबिंब
    2. रंग-बिरंगे पुष्प
    3. अपना विशाल आकार
    4. बादलों का सौंदर्य
  5. प्रस्तुत काव्यांश में कवि ने किसका वर्णन किया है?    [1]
    1. वर्षा ऋतु में पर्वतीय प्रदेश की अलौकिक सुषमा।
    2. वर्षा ऋतु में रंग-बिरंगे पुष्पों की सुंदरता।
    3. पर्वतीय प्रदेशों में पाई जाने वाली वनस्पति।
    4. पर्वतों की तलहटी में पलने वाले तालाब।
आकलन

उत्तर

  1. प्रकृति का रूप सौंदर्य पल-पल नए रूप धारण कर रहा है।
  2. पुष्पों को
  3. स्वच्छता
  4. अपना विशाल आकार
  5. वर्षा ऋतु में पर्वतीय प्रदेश की अलौकिक सुषमा।
shaalaa.com
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
2024-2025 (February) 4/1/2
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×