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प्रश्न
पायसीकर्मक पायस को स्थायित्व कैसे देते हैं। दो पायसीकर्मकों के नाम लिखिए।
उत्तर
द्रव के द्रव में परिक्षेपण को पायस कहते हैं। इसे निम्न प्रकार परिभाषित किया जा सकता है – जब परिक्षेपण माध्यम एवं परिक्षिप्त प्रावस्था दोनों ही द्रव हों तो इन दोनों प्रावस्थाओं से बने कोलॉइडी विलयन को पायस कहा जाता है।
पायसों का निर्माण – दो द्रवों को प्रबल रूप से मिश्रित करके पायस बनाये जा सकते हैं। दो द्रवों को मिश्रित करने के लिये उच्च गति की मिश्रण मशीन (high speed mixing machine) या अल्ट्रासोनिक वाइब्रेटर (ultrasonic vibrator) का प्रयोग किया जाता है। इस प्रक्रम को पायसीकर्मक (emulsification) कहते हैं। चूँकि पायसों को बनाने में प्रयुक्त दोनों द्रव एक-दूसरे में अमिश्रणीय होते हैं अतः पायस को बनाने में एक स्थायीकारक की आवश्यकता होती है, जिसे पायसीकर्मक (emulsifier) कहा जाता है। पायसीकर्मक को घटक द्रवों के साथ मिलाया जाता है। o/w प्रकार के पायस के लिए प्रमुख पायसीकर्मक प्रोटीन, गोंद, प्राकृतिक एवं संश्लेषित साबुन आदि हैं जबकि w/o प्रकार के पायस के लिए वसीय अम्लों के भारी धातुओं के लवण, लंबी श्रृंखला वाले ऐल्कोहॉल, काजल (lamp black) आदि प्रमुख पायसीकर्मक हैं।
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पायसीकर्मक पायस को स्थायी कैसे बनाते हैं?
आप एक पायस में परिक्षिप्त प्रावस्था और परिक्षेपण माध्यम में विभेद कैसे करेंगे?
कॉलम I में दिए कोलॉइडी तंत्रों के प्रकारों को कॉलम II में दिए नामों से सुमेलित कीजिए।
कॉलम I | कॉलम II |
(i) द्रव में ठोस |
(a) फोम
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(ii) ठोस में द्रव |
(b) सॉल
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(iii) द्रव में द्रव |
(c) जेल
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(iv) द्रव में गैस |
(d) पायस
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