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प्रश्न
परितोषण के विलंब से क्या तात्पर्य है? इसे क्यों वयस्कों के विकास लिए महत्वपूर्ण समझा जाता है?
उत्तर
आत्म - नियमन का तात्पर्य हमारे अपने व्यवहार को संगठित और प्रिरिवीक्षण या मॉनिटर करने की योग्यता से है। जिन लोगों में बाह्य पर्यावरण की माँगो के अनुसार अपने व्यवहार को परिवर्तित करने की क्षमता होती है, वे आत्मा-परिवीक्षण में उच्च होते है।
जीवन की कई स्थितियों में स्थितिपरक दबावों के प्रति प्रतिरोध और स्वयं पर नियंत्रण की आवश्यकता होती है। यह संभव होता है उस चीज के द्वारा जिसे हम सामान्यतया 'संकल्प शक्ति' के रूप में जानते है। मनुष्य रूप में हम जिस तरह भी चाहे अपने व्यवहार को नियंत्रित कर सकते हैं। हम प्रायः अपनी कुछ आवश्यकताओं की संतुष्टि को विलंबित अथवा आस्थगित। कर देते हैं। आवश्यकताओं के परितोषण को विलंबित अथवा आस्थगित करने के व्यवहार को सोखना ही आत्मा - नियंत्रण कहा जाता है।
दीर्धावधि लक्ष्यों की संप्राप्ति में आत्म - नियंत्रण एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारतीय सांस्कृतिक परंपराएँ हमें कुछ ऐसे प्रभावी उपाय प्रदान करती हैं जिससे आत्म - नियंत्रण का विकास होता है।
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