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प्रश्न
उत्तर
पूरी कविता में प्रकृति का सुंदर मानवीकरण किया गया है। हमें इसमें निम्नलिखित पंक्तियों का मानवीय करण रूप पसंद है-
हँसते हैं छोटे पौधे लघु भार-
शस्य अपार,
हिल-हिल
खिल-खिल
हाथ हिलाते,
तुझे बुलाते,
तुझे बुलाते,
विप्लव-रव से छोटे ही हैं शोभा पाते।
इस पंक्ति में छोटे पौधों को बच्चों के समान दिखाया गया है। जिस प्रकार बच्चे बात करते हुए हिलते हैं, हँसते हैं, हाथ हिलाते हैं और अपने माता-पिता को बुलाते हैं। उसे कवि ने बड़े सुंदर रूप से पौधे में दर्शाया है। पौधों का यह मानवीकरण दिल को छू जाता है। इसके साथ ही यह मानवीकरण बड़े सरल शब्दों में किया गया है। क्रांति का समर्थन करते ये पौधे मानो अपनी प्रसन्नता व्यक्त कर रहे हों।
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निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए :-
‘बादल राग’ कविता के आधार पर भाव स्पष्ट कीजिए - "विप्लव-रव से छोटे ही हैं शोभा पाते।"