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प्रश्न
राम कौशल्या के पुत्र थे लक्ष्मण सुमित्रा के। इस प्रकार वे परस्पर सहोदर (एक ही माँ के पेट से जन्मे) नहीं थे। फिर, राम ने उन्हें लक्ष्य कर ऐसा क्यों कहा- ''मिलइ न जगत सहोदर भ्राता''? इस पर विचार करें।
थोडक्यात उत्तर
उत्तर
राम और लक्ष्मण सगे भाई नहीं थे। वे सौतले भाई थे लेकिन उनके मध्य जो प्रेम था, वे सगे भाइयों से भी बढ़कर था। लक्ष्मण सदैव राम के साथ छाया के समान बने रहे। राम को जब वनवास मिला, तो वह चुपचाप राम के साथ हो लिए। उन्होंने अपनी पत्नी तथा माता-पिता तक का त्याग कर दिया। बस राम की सेवा को ही अपना कर्तव्य समझा। राम उनके लिए भाई नहीं बल्कि स्वामी के समान थे। अपने सौतेले भाई के प्रेम के कारण ही राम ने ऐसे शब्द कहे। इस प्रकार का प्रेम तो सगा भाई भी नहीं कर सकता, जैसा सौतेले भाई ने किया था। अतः राम उन्हें सगा ही मानते थे। शायद अपने भाई के इसी प्रेम को और भली प्रकार से बताने के लिए उन्होंने ऐसा कहा होगा।
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लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
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