Advertisements
Advertisements
प्रश्न
व्याख्या करें-
मम हित लागि जतेहु पितु माता। सहेहु बिपिन हिम आतप बाता।
जौं जनतेउँ बन बंधु बिछोहू। पितु बचन मनतेउँ नहिं ओहू।।
उत्तर
प्रस्तुत पक्तियों में राम अपने मूर्छित भाई के प्रेम का वर्णन करते हुए बोलते हैं कि ऐसा भाई मिलना बहुत कठिन है। इसने मेरे लिए माता-पिता तक को त्याग दिया। मेरी खातिर यह वन में रहा, वहाँ कि तेज़ हवाओं तथा ठंड तक का सामना किया। अगर मैं यह जानता कि मेरी वजह से लक्ष्मण से अलग होना पड़ेगा, तो मैं पिता के वचनों का पालन ही नहीं करता। अर्थात अगर जानता की लक्ष्मण की दशा इतनी खराब हो जाएगी कि उससे अलग होने की स्थिति बन जाएगी, तो मैं वनवास के लिए नहीं आता।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
व्याख्या करें-
जथा पंख बिनु खग अति दीना। मनि बिनु फनि करिबर कर हीना।
अस मम जिवन बंधु बिनु तोही। जौं जड़ दैव जिआवै मोही।।
जैहउँ अवध कवन मुहुँ लाई। नारि हेतु प्रिय भाइ गँवाई।।
बरु अपजस सहतेउँ जग माहीं।। नारि हानि बिसेष छति नाहीं।।
भाई के शोक में डूबे राम के इस प्रलाप-वचन में स्त्री के प्रति कैसा सामाजिक दृष्टिकोण संभावित है?
कालिदास के रघुवंश महाकाव्य में पत्नी (इंदुमती) के मृत्यु-शोक पर अज तथा निराला की सरोज-स्मृति में पुत्री (सरोज) के मृत्यु-शोक पर पिता के करुण उद्गार निकले हैं। उनसे भ्रातृशोक में डूबे राम के इस विलाप की तुलना करें।