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प्रश्न
संप्रत्यय क्या है? चिंतन प्रक्रिया में संप्रत्यय की भूमिका की व्याख्या कीजिए।
उत्तर
आप यह कैसे जानते हैं की शेर एक पक्षी नहीं है जबकि तोता है ? जब हम एक परिचित अथवा अपरिचित वस्तु या घटना को देखते हैं तब हम वस्तु या घटना के लक्षणों को खोज कर उनका मिलान पहले से विद्यमान वस्तुओं एवं घटनाओं के संवर्ग से करते हुए उसे पहचानने का प्रयास करते हैं। उदाहरणार्थ, जब हम एक सेब को देखते हैं तो इसे हम फल के रूप में वर्गीकृत करते हैं, जब हम एक मेज को देखते हैं तो इसे हम फर्नीचर के रूप में वर्गीकृत करते हैं, जब हम एक कुत्ते को देखते हैं तो इसे हम पशु के रूप में वर्गिकृत्त करते हैं, जब हम एक कुत्ते को देखते हैं तो इसे हम पशु के रूप में वर्गीकृत् करते हैं इत्यादि। जब हम एक नई वस्तु को देखते हैं हम उसके लक्षणों को खोजने का प्रयास करते हैं, पहले से विद्यमान संवर्ग के लक्षणों से मिलान करते हैं और यदि मिलान पूर्ण है तो हम उसे उस संवर्ग का नाम दे देते हैं। उदारणार्थ, सड़क पर टहलते समय आपको बहुत छोटे आकार का एक चतुष्पाद मिल जाता है, चेहरा कुत्ते की तरह है, अपनी पूँछ हिला रहा है और अपरिचितों पर भौंक रहा है। आप नि:संदेह उसकी पहचान एक कुत्ते के रूप में करेंगे और संभवतः सोचेंगे कि यह एक नई प्रजाति का है जिसे आपने पहले कभी नहीं देखा था। आप यह भी निष्कर्ष निकालेंगे की यह अपरिचितों को काटेगा। संप्रत्यय एक संवर्ग का मानस चित्रण है। यह एकसमान या उभयनिष्ठ विशेषता वाली वस्तु, विचार या घटना का वर्ग है।
अधिकांश संप्रत्यय जिनका उपयोग लोग चिंतन में करते हैं वे न तो स्पष्ट होते हैं और न ही असंदिग्ध होते हैं। वे अस्पष्ट होते हैं। वे अस्पष्ट होते हैं। वे एक -दूसरे से कुछ अंश तक मिलते जुलते हैं और प्रायः अस्पष्ट रूप से परिभाषित होते हैं। उदारणार्थ, एक छोटे स्टूल को आप किस संवर्ग में रखेंगे ? क्या आप इसे किसी कुर्सी अथवा मेज के अंतर्गत रखेंगे ? इसका उत्तर संभवतः यह होगा कि हम एक प्रतिमान आदि -प्रारूप का निर्माण करेंगे। किसी संवर्ग का सर्वोत्तम प्रतिनिधि सदस्य आदि प्रारूप का निर्माण करेंगे। किसी संवर्ग का सर्वोत्तम प्रतिनिधि सदस्य आदि प्रारूप होता है। मनोवैज्ञानिक एलिनार रौश (Eleanor Rosch) का तर्क है कि यह समझने में कि लोग संप्रत्यय के विषय में किस प्रकार सोचने हैं, वास्तविक जीवन में प्रायः आदि प्रारूप की आवश्यकता पड़ती है। आदि प्रारूप मिलान करने में लोग एक वस्तु की एक संवर्ग की सबसे प्रतिनिधिक वस्तुओं से तुलना करके यह निश्चित करते हैं कि क्या वह उस संवर्ग का सदस्य है। अतः स्टूल के उपर्युक्त उदहारण में आप इसकी तुलना एक स्तरीय या मानक अध्ययन कुर्सी (यदि आप इसे मेज का एक प्रतिनिधि उदाहरण मानते हैं) से करेंगे और इसके बाद स्टूल की विशेषताओं का मिलान इन दोनों संप्राततयों से करेंगे। यदि यह कुर्सी से मेल खाता
एक कप कब 'कप' होता है?
है तो इसे आप कुर्सी संवर्ग में रखेंगे अन्यथा इसे मेज संवर्ग में रखेंगे। दूसरे उदाहरण को लें- 'कप' का संप्रत्यय। कप (1) मूर्त वस्तु है, (2) उन्नतोदर है, (3) इनमें ठोस या द्रव को रखा जा सकता है, (4) इनमें हैंडल होते हैं। उन कपों के विषयों में क्या कहेंगे जिन्हें हम बाजार में देखते हैं, जिनमें हैंडल नहीं है, रूप में वर्गाकार हैं अथवा आकर में बड़ा हैं ? एक प्रयोग में प्रतिभागियों को उपर्युक्त चित्र की तरह कपों के चित्र दिखाए गए और डब्ल्यू, लेबाव (W. Labov) ने उनसे पूछा -आप इनमें से किसे 'कप' संप्रत्यय का आदि-प्रारूप कहेंगे। प्रतिभागियों ने प्रायः पाँचवे नंबर को चुना। रोचक बात यह रही कि कुछ प्रतिभागियों ने 4 नंबर को एक कटोरा तथा 9 नंबर को एक फूलदान कहा क्योंकि वे बहुत भिन्न थे।