Advertisements
Advertisements
प्रश्न
संवदिया कि क्या विशेषताएँ हैं और गाँववालों के मन में संवदिया की क्या अवधारणा हैं?
उत्तर
संवदिया कि विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
- दिए गए संवाद को जैसे है, वैसा ही बोलना पड़ता है।
- संवाद के साथ भावों को भी वैसे का वैसा बताना पड़ता है।
- संवाद को समय पर पहुँचाना एक संवदिया की विशेषता होती है।
- संवदिया को भावनाओं में नहीं बहना चाहिए। उसे संवाद को भावनाओं से अलग रखना चाहिए।
- उसे मार्ग का ज्ञान होना चाहिए।
- संवाद को पहुँचाने में गोपनियता बहुत आवश्यक है।
गाँववालों के मन में अवधारणा है कि संवदिया एक कामचोर, निठल्ला तथा पेटू आदमी होता है, जिसके पास कोई काम नहीं होता, वह संवदिया बन जाता है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
बड़ी हवेली से बुलावा आने पर हरगोबिन के मन में किस प्रकार की आशंका हुई?
बड़ी बहुरिया अपने मायके संदेश क्यों भेजना चाहती थी?
संवाद कहते वक्त बड़ी बहुरिया की आँखें क्यों छलछला आईं?
हरगोबिन बड़ी हवेली में पहुँचकर अतीत की किन स्मृतियों में खो जाता है?
बड़ी बहुरिया का संवाद हरगोबिन क्यों नहीं सुना सका?
'संवदिया डटकर खाता है और अफर कर सोता है' से क्या आशय है?
जलालगढ़ पहुँचने के बाद बड़ी बहुरिया के सामने हरगोबिन ने क्या संकल्प लिया?
इन शब्दों का अर्थ समझिए-
काबुली-कायदा
इन शब्दों का अर्थ समझिए-
रोम-रोम कलपने लगा
इन शब्दों का अर्थ समझिए-
अगहनी धान
पाठ से प्रश्नवाचक वाक्यों को छाँटिए और संदर्भ के साथ उन पर टिप्पणी लिखिए।
इन पंक्ति की व्याख्या कीजिए -
बड़ी हवेली अब नाममात्र की ही बड़ी हवेली है।
इन पंक्तियों की व्याख्या कीजिए-
हरगोबिन ने देखी अपनी आँखों से द्रौपदी की चीरहरण लीला।
इन पंक्तियों की व्याख्या कीजिए-
बथुआ साग खाकर कब तक जीऊँ?
इन पंक्तियों की व्याख्या कीजिए-
किस मुँह से वह ऐसा संवाद सुनाएगा।
डिजिटल इंडिया के दौर में संवदिया की किया कोई भूमिका हो सकती है?
‘उसके पैर गाँव की ओर बढ़ ही नहीं रहे थे। इसी पगडंडी से बड़ी बहुरिया अपने मैके लौटा आवेगी गाँव छोड़कर चली जावेगी। फिर कभी नहीं आवेगी।’
लेखक संवदिया और बड़ी बहुरिया के माध्यम से समाज के एक बड़े वर्ग का वर्णन करत प्रतीत हो रहे हैं। इसे स्पष्ट करते हुए वर्तमान परिप्रेक्ष्य के साथ संबंध स्थापित कीजिए।
'बड़ी बहुरिया का संवाद हरगोबिन सुना सकने में असमर्थ था' कथन के माध्यम से हरगोबिन की तत्कालीन स्थिति की विवेचना कीजिए।