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प्रश्न
सर्जनात्मक चिंतन को कैसे बढ़ाया जा सकता है?
उत्तर
सर्जनात्मक चिंतन का सामर्थ्य हम सभी में है। यह कुछ थोड़े से प्रतिभाशाली कलाकारों या वैज्ञानिकों या कुछ चुनिंदा लोगों तक ही सीमित नहीं है। सर्जनात्मक चिंतन की अभिव्यक्ति एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न हो सकती है। कोई व्यक्ति किस सीमा तक सर्जनात्मक हो सकता है, इसके निर्धारण में यद्यपि आनुवंशिक कारक महत्त्वपूर्ण हैं, तथापि पर्यावरणीय कारक सर्जनात्मक चिंतन योग्यताओं के विकास को प्रोत्साहित या बाधित करते हैं। भारत सहित विभिन्न देशों में शोधकर्ताओं परिवेशीय कारकों के कारण विभिन्न अवस्थाओं के स्कूल के बच्चों के सर्जनात्मक चिंतन के स्तर में गिरावट प्रदर्शित की है। इसके विपरीत शोधकर्ताओं ने यह भी बताया है कि निम्न सामाजिक-आर्थिक समूहों, सजातीय और अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चों में काफी अविकसित सर्जनात्मकता होती है और वे अनेक प्रकार से सर्जनात्मक होते हैं।
शोध से यह भी स्पष्ट हुआ है कि हम सभी अभ्यास एवं प्रशिक्षण के द्वारा अपनी सर्जनात्मक चिंतन योग्यताओं का समुचित उपयोग कर सकते हैं। दिन-प्रतिदिन की समस्याओं का सर्जनात्मक एवं प्रभावशाली समाधान करने में हम अधिक कल्पनाशील, लचीला एवं मौलिक बन सकते हैं। एक व्यक्ति के विकास एवं परिपूर्णता के लिए सर्जनात्मक चिंतन का विकास महत्त्वपूर्ण है।