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प्रश्न
उन तीन बातों का जिक्र करें जिनसे साबित होता है की शीतयुद्ध की समाप्ति के बाद अमरीकी प्रभुत्व का स्वाभाव बदला है और शीतयुद्ध के वर्षो के अमरीकी प्रभुत्व की तुलना में यह अलग है।
उत्तर
शीतयुद्ध की समाप्ति के बाद अमरीकी प्रभुत्व की प्रकृति में बदलाव : वैसे तो दूसरे विश्वयुद्ध के बाद ही अमरीका ने विश्व राजनीति में अपना प्रभुत्व प्रदर्शित करना आरंभ कर दिया था परन्तु वह दादागिरी की प्रकृति का नहीं था क्योंकि उस समय उस के प्रभुत्व को, उसकी शक्ति को सोवियत संघ चुनौती देता रहता था और उसे अपने गठबंधन को मजबूत बनाए रखने के लिए अपने सहयोगियों तथा छोटे - छोटे देशों की भी आवश्यकता महसूस होती थी और वह पूर्ण रूप से मनमानी नहीं कर पाता था। परन्तु शीतयुद्ध की समाप्ति के बाद उसके प्रभुत्व की प्रकृति में बदलाव आया और वह दादागिरी की तरह व्यवहार करने लगा। इसके तीन उदाहरण निम्नलिखित हैं -
- 1990 में पहला खाड़ी युद्ध हुआ था जो इराक को कुवैत से भगाने के लिए किया गया था। उस समय भी इसमें लगभग ३/४ से अधिक सैन्य शक्ति अमरीका की थी। यह संयुक्त राष्ट्र के आधार पर किया गया था। 2003 में अमरीका ने जब इराक पर आक्रमण किया तो उसे संयुक्त राष्ट्र की अनुमति की आवश्यकता नहीं पड़ी। अपने सहयोगी राष्ट्रों जैसे की फ्रांस और रूस तथा संयुक्त राष्ट्र के विरोध के बावजूद भी उसने सार्वजनिक नरसंहार के हथियारों का बहाना करके इराक पर आक्रमण कर दिया जो की अंतर्राष्टीय कानून तथा संयुक्त राष्ट्र संघ के सिद्धांतो के विपरीत था।
- 1999 में युगोस्लवीय के क्षेत्र पर नाटो द्वारा की गई बमबारी इसका एक और उदाहरण हैं। युगोस्लाविया के प्रांत कोसोवो में अल्बनियाई लोगों द्वारा किए गए आंदोलन को कुचलने के लिए यह बमबारी की गई थी जो लगभग दो महीने तक चली। यह भी संयुक्त राष्ट्र की अनुमति के बिना तथा अंतराष्ट्रीय कानूनों की अवहेलना करते हुए की गई थी।
- 9/11 की घटना अथवा 11 सितम्बर, 2001 में अमरीका के महत्त्वपूर्ण भवनों पर आंतकवादी हमलों के बाद अमरीका ने सारे संसार में आतंकवाद को समाप्त करने के लिए, ऑपरेशन एन्ड्यूरिंग फ्रीडम चलाया और अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर आक्रमण कर दिया। अफगानिस्तान से तालिबान सरकार को समाप्त किया गया और अमरीका की पसंद की सरकार स्थापित की गई। इसके साथ ही अमरीका सेनाओ ने सारे संसार में गिरफ़्तारयाँ कीं और बंदी बनाए गए लोगों को यातनाएँ दीं तथा उन्हें क़ानूनी सहायता से भी वंचित रखा। आतंकवादी होने के शक में लोगों को कानूनों का उल्लंघन करते हुए लम्बे समय तक बंदी बनाए रखा और अपने कानूनों तथा अन्तर्राष्टीय कानूनों का भी उल्लंघन किया। यह भी दादागिरी का एक नमूना हैं।
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