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'यह अद्वितीय-यह मेरा-यह मैं स्वयं विसर्जित'- पंक्ति के आधार पर व्यष्टि के समष्टि में विसर्जन की उपयोगिता बताइए। - Hindi (Elective)

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प्रश्न

'यह अद्वितीय-यह मेरा-यह मैं स्वयं विसर्जित'- पंक्ति के आधार पर व्यष्टि के समष्टि में विसर्जन की उपयोगिता बताइए।

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

जब व्यष्टि का समष्टि में विसर्जन होता है, तब उसकी उपयोगिता बढ़ जाती है। प्रत्येक व्यक्ति सभी गुणों से युक्त है लेकिन समाज में उसका विलय नहीं है, तो वह अकेला होगा। अकेला वह अपने गुणों का लाभ न स्वयं उठा पाएगा और न किसी अन्य का भला कर पाएगा। जब वह समाज के साथ जुड़ जाता है, तब उसके गुणों का सही लाभ उठाया जा सकता है। अपने गुणों से वह समाज का कल्याण करता है। इस तरह वह अपने साथ-साथ समाज का भी सही मार्गदर्शन करता है। समाज का विकास होता है और समाज में एकता स्थापित होती है। तभी कवि ने कहा है कि दीप का पंक्ति में विलय होना अर्थात एक व्यक्ति का समाज में विलय होना है। समाज में विलय होने से वह स्वयं के व्यक्तित्व को विशालता प्रदान करता है। वह अकेले बहुत कुछ कर सकने की हिम्मत रखता है। जब वह स्वयं को समाज में मिला लेता है, तो वह समाज को मज़बूत कर देता है। इससे हमारे राष्ट्र को मज़बूती मिलती है।

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यह दीप अकेला
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पाठ 1.03: सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' (यह दिप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ १८]

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एनसीईआरटी Hindi - Antara Class 12
पाठ 1.03 सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' (यह दिप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद)
प्रश्न-अभ्यास | Q 4. | पृष्ठ १८

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