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Chapters
1: हरिवंश राय बच्चन (आत्मपरिचय, एक गीत)
2: आलोक धन्वा (पतंग)
3: कुँवर नारायण (कविता के बहाने, बात सीधी थी पर)
4: रघुवीर सहाय (कैमरे में बंद अपाहिज)
5: गजानन माधव मुक्तिबोध (सहर्ष स्वीकारा है)
6: शमशेर बहादुर सिंह (उषा)
7: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (बादल राग)
8: तुलसीदास (कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप)
9: फ़िराक गोरखपुरी (रुबाइयाँ, गज़ल)
10: उमाशंकर जोशी (छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख)
गद्य खंड
11: महादेवी वर्मा (भक्तिन)
12: जैनेन्द्र कुमार (बाज़ार दर्शन)
13: धर्मवीर भारती (काले मेघा पानी दे)
14: फणीश्वर नाथ रेणु (पहलवान की ढोलक)
15: विष्णु खरे (चार्ली चैप्लिन यानी हम सब)
16: रज़िया सज्जाद ज़हीर (नमक)
▶ 17: हजारी प्रसाद द्विदेदी (शिरीष के फूल)
18: बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर (श्रम विभाजन और जाति-प्रथा, मेरी कल्पना का आदर्श समाज)

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Solutions for Chapter 17: हजारी प्रसाद द्विदेदी (शिरीष के फूल)
Below listed, you can find solutions for Chapter 17 of CBSE NCERT for Hindi - Aaroh Class 12.
NCERT solutions for Hindi - Aaroh Class 12 17 हजारी प्रसाद द्विदेदी (शिरीष के फूल) अभ्यास [Pages 148 - 149]
पाठ के साथ
लेखक ने शिरीष को कालजयी अवधूत (संन्यासी) की तरह क्यों माना है?
आशय स्पष्ट कीजिए-
दुरंत प्राणधारा और सर्वव्यापक कालाग्नि का संघर्ष निरंतर चल रहा है। मूर्ख समझते हैं कि जहाँ बने हैं, वहीं देर तक बने रहें तो कालदेवता की आँख बचा पाएँगे। भोले हैं वे। हिलते-डुलते रहो, स्थान बदलते रहो, आगे की ओर मुँह किए रहो तो कोड़े की मार से बच भी सकते हो। जमे कि मरे।
जो कवि अनासक्त नहीं रह सका, जो फक्कड़ नहीं बन सका, जो किए-कराए का लेख-जोखा मिलाने में उलझ गया, वह भी क्या कवि है? मैं कहता हूँ कवि बनना है मेरे दोस्तो, तो फक्कड़ बनो।
आशय स्पष्ट कीजिए-
फूल हो या पेड़, वह अपने-आप में समाप्त नहीं है। वह किसी अन्य वस्तु को दिखाने के लिए उठी हुई अँगुली है। वह इशारा है।
पाठ के आसपास
कोमल और कठोर दोनों भाव किस प्रकार गांधीजी के व्यक्तित्व की विशेषता बन गए।
भाषा की बात
दस दिन फूले और फिर खंखड़-खंखड़ इस लोकोक्ति से मिलते-जुलते कई वाक्यांश पाठ में हैं। उन्हें छाँट कर लिखें।
इन्हें भी जाने
अशोक वृक्ष- भारतीय साहित्य में बहुचर्चित एक सदाबहार वृक्ष। इसके पत्ते आम के पत्तों से मिलते हैं। वसंत-ऋतु में इसके फूल लाल-लाल गुच्छों के रूप में आते हैं। इसे कामदेव के पाँच पुष्पवाणों में एक माना गया है। इसके फल सेम की तरह होते हैं। इसके सांस्कृतिक महत्त्व का अच्छा चित्रण हज़ारी प्रसाद द्विवेदी ने निबंध अशोक के फूल में किया है। भ्रमवश आज एक दूसरे वृक्ष को अशोक कहा जाता रहा है और मूल पेड़ (जिसका वानस्पतिक नाम सराका इंडिका है।) को लोक भूल गए हैं। इसकी एक जाति श्वेत फूलों वाली भी होती है।
अरिष्ठ वृक्ष- रीठा नामक वृक्ष। इसके पत्ते चमकीले हरे होते हैं। फल को सुखाकर उसके छिलके का चूर्ण बनाया जाता है, बाल धोने एवं कपड़े साफ करने के काम में आता है। पेड़ की डालियों व तने पर जगह-जगह काँटे उभरे होते हैं, जो बाल और कपड़े धोने के काम भी आता है।
इन्हें भी जाने
आरग्वध वृक्ष- लोक में उसे अमलतास कहा जाता है। भीषण गरमी की दशा में जब इसका पड़े पत्रहीन ठूँठ सा हो जाता है, पर इस पर पीले-पीले पुष्प गुच्छे लटके हुए मनोहर दृश्य उपस्थित करते हैं। इसके फल लगभग एक डेढ़ फुट के बेलनाकार होते हैं जिसमें कठोर बीज होते हैं।
इन्हें भी जाने
आरग्वध वृक्ष- लोक में उसे अमलतास कहा जाता है। भीषण गरमी की दशा में जब इसका पड़े पत्रहीन ठूँठ सा हो जाता है, पर इस पर पीले-पीले पुष्प गुच्छे लटके हुए मनोहर दृश्य उपस्थित करते हैं। इसके फल लगभग एक डेढ़ फुट के बेलनाकार होते हैं जिसमें कठोर बीज होते हैं।
इन्हें भी जाने
शिरीष वृक्ष- लोक में सिरिस नाम से मशूहर पर एक मैदानी इलाके का वृक्ष है। आकार में विशाल होता है पर पत्ते बहुत छोटे-छोटे होते हैं। इसके फूलों में पंखुड़ियों की जगह रेशे-रेशे होते हैं।
Solutions for 17: हजारी प्रसाद द्विदेदी (शिरीष के फूल)

NCERT solutions for Hindi - Aaroh Class 12 chapter 17 - हजारी प्रसाद द्विदेदी (शिरीष के फूल)
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