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10 g द्रव्यमान और 500 m/s चाल वाली बन्दूक की गोली एक दरवाजे के ठीक केन्द्र में टकराकर उसमें अंतः स्थापित हो जाती है। - Physics (भौतिक विज्ञान)

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Question

10 g द्रव्यमान और 500 m/s चाल वाली बन्दूक की गोली एक दरवाजे के ठीक केन्द्र में टकराकर उसमें अंतः स्थापित हो जाती है। दरवाजा 1.0m चौड़ा है और इसका द्रव्यमान 12 kg है। इसके एक सिरे पर कब्जे लगे हैं और यह इनसे गुजरती एक ऊर्ध्वाधर अक्ष के परितः लगभग बिना घर्षण के घूम सकता है; गोली के दरवाजे में अन्तःस्थापना के ठीक बाद इसका कोणीय वेग ज्ञात कीजिए।
[संकेत : एक सिरे से गुजरती ऊध्र्वाधर अक्ष के परितः दरवाजे का जड़त्व-आघूर्ण ML2/3 है]

Numerical

Solution

गोली का द्रव्यमान m = 10 g = 10 × 10-3 kg

गोली की चाल ν = 500 m/s

दरवाजे की चौड़ाई L = 1.0 m

दरवाजे के एक सिरे से गुजरने वाले अक्ष के परितः दरवाजे का जड़त्व आघूर्ण

`"I"_0 = "ML"^2/3`    ...(जहाँ M = दरवाजे का द्रव्यमान = 12 kg)

दरवाजे से गोली के टकराते क्षण दरवाजा स्थिर था तथा गोली गतिमान थी।

इस क्षण निकाय का कोणीय संवेग J1 = गोली का कोणीय संवेग = mνr

जहाँ `"r" = "L"/2` (चूँकि गोली दरवाजे के ठीक मध्य में टकराती है)

∴ `"J"_1 = 10 xx 10^-3  "kg"  xx 500  "m"//"s" xx (1.0//2)` m

= 2.5 kg m2/s

जब गोली दरवाजे में अन्तःस्थापित हो जाती है तो (गोली + दरवाजा) निकाय अक्ष के परितः घूम जाता है। माना इसका कोणीय वेग ω है।

इस स्थिति में निकाय का जड़त्व आघूर्ण = दरवाजे का जड़त्व आघूर्ण + गोली का जड़त्व आघूर्ण = `("ML"^2/3 + "mr"^2) = [(12 xx 1^2)/3 + 10 xx 10^-3 xx (1.0/2)^2]` kg/m2

= `[4 + 2.5 xx 10^-3] "kg"  "m"^2`

= 4.0025 kg m2

माना इस निकाय के घूर्णन का कोणीय वेग ω है। अतः निकाय का कोणीय संवेग J2 = Iω

∴ J2 = `(4.0025) xx "ω"` kg m2/s

कोणीय संवेग- संरक्षण सिद्धांत से, J2 = J1

∴ 4.0025 × ω = 2.5

अथवा  ω = `(2.5/4.0025) "rad"//"s"`

= 0.6246 rad/s

≈ 0.625 rad/s

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जड़त्व आघूर्ण
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Chapter 7: कणों के निकाय तथा घूर्णी गति - अभ्यास [Page 184]

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NCERT Physics [Hindi] Class 11
Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति
अभ्यास | Q 7.24 | Page 184

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M द्रव्यमान एवं R त्रिज्या वाली किसी डिस्क का इसके किसी व्यास के परित; जड़त्व-आघूर्ण MR2 /4 है। डिस्क के लम्बवत् इसकी कोर से गुजरने वाली अक्ष के परितः इस चकती का जड़त्व-आघूर्ण ज्ञात कीजिए।


20 kg द्रव्यमान का कोई ठोस सिलिंडर अपने अक्ष के परितः 100 rad s-1 की कोणीय चाल से घूर्णन कर रहा है। सिलिंडर की त्रिज्या 0.25 m है। सिलिंडर के घूर्णन से संबद्ध गतिज ऊर्जा क्या है? सिलिंडर का अपने अक्ष के परितः कोणीय संवेग का परिमाण क्या है?


ऑक्सीजन अणु का द्रव्यमान 5.30 × 10-26 kg है तथा इसके केन्द्र से होकर गुजरने वाली और इसके दोनों परमाणुओं को मिलाने वाली रेखा के लम्बवत् अक्ष के परितः जड़त्व-आघूर्ण 1.94 × 10-46 kg-m2 है। मान लीजिए कि गैस के ऐसे अणु की औसत चाल 500 m/s है और इसके घूर्णन की गतिज ऊर्जा, स्थानान्तरण की गतिज ऊर्जा की दो-तिहाई है। अणु का औसत कोणीय वेग ज्ञात कीजिए।


कोई व्यक्ति एक घूमते हुए प्लेटफॉर्म पर खड़ा है। उसने अपनी दोनों बाहें फैला रखी हैं और उनमें से प्रत्येक में 5 kg भार पकड़ रखा है। प्लेटफॉर्म की कोणीय चाल 30 rev/min है। फिर वह व्यक्ति बाहों को अपने शरीर के पास ले आता है जिससे घूर्णन अक्ष से प्रत्येक भार की दूरी 90 cm से बदलकर 20 cm हो जाती है। प्लेटफॉर्म सहित व्यक्ति के जड़त्व आघूर्ण का मान 7.6 kg-m2 ले सकते हैं।
(a) उसका नया कोणीय वेग क्या है? (घर्षण की उपेक्षा कीजिए)
(b) क्या इस प्रक्रिया में गतिज ऊर्जा संरक्षित होती है? यदि नहीं, तो इसमें परिवर्तन का स्रोत क्या है?


दो चक्रिकाएँ जिनके अपने-अपने अक्षों (चक्रिका के अभिलंबवत् तथा चक्रिका के केंद्र से गुजरने वाले) के परितः जड़त्व-आघूर्ण I1 तथा I2 हैं और जो ω1 तथा ω2 कोणीय चालों से घूर्णन कर रही हैं, को उनके घूर्णन अक्ष संपाती करके आमने-सामने  लाया जाता है।

  1. इस दो चक्रिका निकाय की कोणीय चाल क्या है?
  2. यह दर्शाइए कि इस संयोजित निकाय की गतिज ऊर्जा दोनों चक्रिकाओं की आरंभिक गतिज ऊर्जाओं के योग से कम है। ऊर्जा में हुई इस हानि की आप कैसे व्याख्या करेंगे? ω1 ≠ ω2 लीजिए।

समांतर अक्षों के प्रमेय की उपपत्ति करें। [संकेत : यदि द्रव्यमान केन्द्र को मूलबिन्दु ले लिया जाए ∑mi r= 0]


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