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आधुनि क जीवन शैली के कारण निर्मि त समस्याओं से जूझने की प्रेरणा इन त्रिवेणियों से मिल ती है, स्पष्ट कीजि ए । - Hindi

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Question

आधुनिक जीवन शैली के कारण निर्मि त समस्याओं से जूझने की प्रेरणा इन त्रिवेणियों से मिल ती है, स्पष्ट कीजि ए ।

Answer in Brief

Solution

 त्रिपुरारि जी की त्रिवेणी नामक नए काव्य प्रकार में लिखी हई प्रेरणा' शीर्षक कविता में सीधे-सादे शब्दों में अत्यंत प्रभावशाली ढंग से आधुनिक जीवन शैली के कारण निर्मित समस्याओं से दृढ़ता पूर्वक लड़ने की प्रेरणा मिलती है। आधुनिक जीवन शैली में बिछोह एक प्रमुख समस्या है। शिक्षा के विकास के कारण समाज में शिक्षित युवक-युवतियों की निरंतर वृद्धि हो रही है। इसलिए शिक्षित युवक-युवतियों को जहाँ भी नौकरी मिलती है, उन्हें घर छोड़कर वहाँ जाना पड़ता है। इसमें माता-पिता तथा इन युवक-युवतियों को बिछोह का दुख सहना पड़ता है। प्रस्तुत काव्य में इस बिछोह के दुख और उससे जूझने का सुंदर चित्रण किया गया है। माँ से दूर रहने वाला नौकरीपेशा बेटा अपनी माँ को जब फोन करता है, तो माँ कुछ बोलने के बजाय रोने लगती है। हालांकि रोने का कोई कारण नहीं होता, पर उसकी सिसकियाँ रुकती नहीं हैं। बाद में बेटा भी रोए बिना नहीं रहता पर वह इस समस्या का सामना करता है और बिछोह का दुख भुला देता है। पास होते हुए भी माता-पिता की आफिस में अलग-अलग शिफ्ट होने के कारण उन्हें बच्चों से एक साथ न मिल पाने का दुख सहना पड़ता है। पर इससे वे निराश नहीं होते और इस स्थिति को स्वीकार करके उनका हल निकालने का प्रयास करते हैं। जीवन-यात्रा में ठोकरें खाना आम बात है। पर ठोकर खाकर गिरने के बाद उठकर आगे बढ़ते रहने वाले को ही मंजिल मिलती है। कहा भी गया है - सुर्खरू - होता है इंसां ठोकरें खाने के बाद 'गिर जाओ, खुद को सँभालो और फिर से चलो' पंक्ति से आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा मिलती है। इसी तरह कवि बुरे दिन आने पर निराश न होने का आवाहन करते हैं। बुरे दिनों के बाद अच्छे दिन भी आते हैं – 'रात की कोख ही से सुबह जनम लेती है।' पंक्ति में इसी की प्रेरणा मिलती है। जीवन में मुश्किलें आना स्वाभाविक है। पर इनसे घबराना नहीं चाहिए। कवि उम्मीदों के सहारे कठिनाइयों का सामना करने की प्रेरणा देते हैं। इस प्रकार इन त्रिवेणियों से आधुनिक जीवनशैली के कारण निर्मित समस्याओं से जूझने की प्रेरणा मिलती है।

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पद्य (Poetry) (11th Standard)
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Chapter 1: प्रेरणा - स्वाध्याय [Page 4]

APPEARS IN

Balbharati Hindi - Yuvakbharati 11 Standard Maharashtra State Board
Chapter 1 प्रेरणा
स्वाध्याय | Q ४. | Page 4

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