English

‘आज इस विजय में मेरी सबसे बड़ी पराजय हुई है’ महाराणा के इस कथन पर अपने विचार लिखिए। - Hindi [हिंदी]

Advertisements
Advertisements

Question

‘आज इस विजय में मेरी सबसे बड़ी पराजय हुई है’ महाराणा के इस कथन पर अपने विचार लिखिए।

Answer in Brief

Solution

महाराणा ने अपने सेनापति अभय सिंह को बूँदी भेजा था, ताकि वे राव हेमू को मेवाड़ की अधीनता स्वीकार करने के लिए राजी कर सके। महाराणा राजपूत राजाओं को मेवाड़ के झंडे के नीचे एकत्र करना चाहते थे ताकि समय आने पर विदेशी शक्तियों का मुकाबला कर सकें। राव हेमू का प्रस्ताव था कि वे मेवाड़ की अधीनता नहीं स्वीकार करेंगे। हाँ, प्रेम का अनुशासन मानने के लिए हाड़ा हमेशा तैयार हैं। महाराणा को राव हेमू की यह प्रतिक्रिया अच्छी नहीं लगी और उन्होंने बिना सोच-विचारे एक अविवेकपूर्ण प्रतिज्ञा की कि जब तक वे ससैन्य बूँदी के दुर्ग में प्रवेश नहीं करेंगे, तब तक अन्न-जल नहीं ग्रहण करेंगे। चारणी के सुझाव पर राजा ने बूँदी का एक नकली दुर्ग बनवाया और निश्चय किया कि वे उसमें प्रवेश कर फिलहाल प्रतिज्ञा पूरी कर लेंगे। नकली बूँदी के दुर्ग पर भी मेवाड़ की पताका फहराने के लिए उन्हें नाकों चने चबाने पड़े तथा उन्होंने अपने कुछ वीर सैनिकों को खो दिया। इसलिए उनका यह कहना बिलकुल ठीक है कि आज इस विजय में मेरी सबसे बड़ी पराजय हुई है। जो काम स्नेह से हो सकता था, उसके लिए शक्ति का प्रयोग ठीक नहीं है।

shaalaa.com
मातृभूमि का मान
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 1.07: मातृभूमि का मान - स्वाध्याय [Page 31]

APPEARS IN

Balbharati Hindi - Kumarbharati 9 Standard Maharashtra State Board
Chapter 1.07 मातृभूमि का मान
स्वाध्याय | Q १ | Page 31
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×