Advertisements
Advertisements
Question
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
आज विश्व के कई देशों में अदरक वाली भारतीय चाय का चस्का लोगों को ऐसा लग गया है कि वहाँ हर कोई भारतीय चाय का शौकीन हो गया है। इसके अलावा भारत में कुल्हड़ वाली चाय भी काफी लोकप्रिय है। मिट्टी के कुल्हड़ में परोसी गई चाय का अपना विशेष महत्त्व है क्योंकि इसकी सौंधी खुशबू और लाजवाब स्वाद को इसके बिना अनुभव नहीं कर सकते हैं। भारत की सिफारिश पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 मई को अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस घोषित किया है। भारत ने मिलान में हुई अंतर्राष्ट्रीय खाद्य और कृषि संगठन की बैठक में यह प्रस्ताव पेश किया था। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपनी अधिसूचना में कहा कि हम विश्व की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में चाय के योगदान को लेकर दुनिया को जागरूक करना चाहते हैं, ताकि वर्ष 2030 के सतत विकास से जुड़े लक्ष्यों को पूरा किया जा सके। संयुक्त राष्ट्र को विश्वास है कि 21 मई को अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस घोषित करने से इसके उत्पादन और खपत बढ़ाने में मदद मिलेगी। अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस चाय दिवस का उद्देश्य दुनिया भर में चाय के लंबे इतिहास और गहरे सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इस दिन का लक्ष्य चाय के स्थायी उत्पादन और खपत के पक्ष में गतिविधियों को लागू करने के लिए सामूहिक कार्यों को बढ़ावा देना और भूख और गरीबी से लड़ने में इसके महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासभा ने चाय के औषधीय गुणों के साथ सांस्कृतिक महत्त्व को भी मान्यता दी है। विश्व में चाय के प्रमुख उत्पादकों में एशिया, अफ्रीका, दक्षिणी अमेरिका शामिल हैं। जबकि विश्व के चार बड़े उत्पादक देशों में क्रमशः चीन, भारत, कीनिया और श्रीलंका शामिल हैं। विश्व के कुल चाय उत्पादन में इन देशों की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत है। भारत विश्व में चाय उत्पादन का एक बड़ा केंद्र है। भारत में चाय का उत्पादन करने वाले राज्यों में असम, पश्चिमी बंगाल, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु शामिल हैं। असम भारत का सर्वाधिक चाय उत्पादन करने वाला राज्य है। भारत में लगभग 3 हज़ार चाय बागान हैं, जो 60 लाख से अधिक श्रमिकों की आजीविका का प्रमुख साधन भी हैं। चाय एक श्रम आधारित उद्योग है इसलिए भारत जैसे देश में इसके विकास की अपार संभावनाएँ हैं। चाय की चुनाई के लिए अधिक मात्रा में श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है, क्योंकि चाय की पत्तियाँ एक-एक कर तोड़ी जाती हैं, जिनसे कोमल पत्तियाँ नष्ट ना हों। अपनी कोमल अंगुलियों के कारण ही चाय के उद्यानों में स्त्री मजदूर द्वारा पत्तियाँ तोड़ी जाती हैं। चाय की पत्ती तोड़ने के काम के लिए श्रमिकों को पूरे दिन खड़े रहना पड़ता है - चाहे वह चिलचिलाती धूप में हो या बारिश में। वे आम तौर पर उस हिस्से तक पहुँचने के लिए चार से पांच किलोमीटर पैदल चलते हैं जहाँ वे चाय की पत्तियां चनते हैं। |
(क) कथन (A) और कारण (R) को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए: (1)
कथन (A): संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 मई को 'अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस' घोषित किया।
कारण (R): विश्व की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में चाय की अहमियत को समझाना।
- कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
- कथन (A) और कारण (R) दोनों ही गलत हैं।
- कथन (A) सही है और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या है।
- कथन (A) सही है किंतु कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(ख) भारत में कुल्हड़ वाली चाय काफो लोकप्रिय है क्योंकि - (1)
कथन के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए -
- सौंधी खुशबू होती है।
- लाजवाब स्वाद होता है।
- बहुत मँहगी होती है।
- आसानी से उपलब्ध है।
विकल्प-
- कथन। और॥ सही हैं।
- कथन I, III और IV सही हैं।
- केवल कथन III सही है।
- कथन।,॥ और IV सही हैं।
(ग) नीचे दिए हुए कॉलम 1 को कॉलम 2 से सुमेलित कर सही विकल्प का चयन कीजिए - (1)
कॉलम 1 | कॉलम 2 |
। विश्व में चाय का सबसे बड़ा उत्पादक देश | 1 - भारत |
॥ भारत में चाय का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य | 2 - चीन |
III विश्व में चाय का दूसरा बड़ा उत्पादक देश | 3 - असम |
- I (1) II (2) III (3)
- I (2) II (3) III (1)
- I (3) II (1) III (2)
- I (1) II (3) III (2)
(घ) चाय के उत्पादन और खपत बढाने में 'अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस' की क्या भूमिका है? (2)
(ङ) चाय एक श्रम आधारित उद्योग है - कैसे? (2)
Solution
(क) कथन (A) सही है और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या है।
(ख) कथन। और॥ सही हैं।
(ग) I (2) II (3) III (1)
(घ) करोड़ों लोग चाय के व्यापार से जुड़े हुए हैं। उनके हितों की रक्षा और जागरूकता जरूरी है। इसी के चलते चायपत्ती की खपत और मांग बढ़ाने पर जोर डालने में 'अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस' की महत्वपुर्ण भूमिका है।
(ङ) चाय एक श्रम आधारित उद्योग है। अधिक मात्रा में श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है, बहुत सावधानी से चाय की पत्तियाँ एक-एक कर तोड़ी जाती हैं। श्रमिकों को पूरे दिन खड़े रहना पड़ता है, यह श्रमसाध्य कार्य है।