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आपके विचार से निम्नलिखित में से कौन-सी आवश्यक दशाएँ थीं जिनकी वजह से प्रारंभ में शहरीकरण हुआ था और निम्नलिखित में से कौन-कौन सी बातें शहरों के विकास के फलस्वरूप उत्पन्न हुईं? - History (इतिहास)

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Question

आपके विचार से निम्नलिखित में से कौन-सी आवश्यक दशाएँ थीं जिनकी वजह से प्रारंभ में शहरीकरण हुआ था और निम्नलिखित में से कौन-कौन सी बातें शहरों के विकास के फलस्वरूप उत्पन्न हुईं?

  1. अत्यंत उत्पादक खेती
  2. जल-परिवहन
  3. धातु और पत्थर की कमी
  4. श्रम-विभाजन
  5. मुद्राओं का प्रयोग
  6. राजाओं की सैन्य-शक्ति जिसने श्रम को अनिवार्य बना दिया।
Long Answer

Solution

कांस्यकालीन सभ्यताओं के दौरान अनेक शहरों का विकास हुआ। वस्तुत: शहर विशाल जनसंख्या के निवास स्थान होते हैं और इसके अतिरिक्त अनेक महत्त्वपूर्ण आर्थिक गतिविधियों के केंद्रबिंदु भी हैं। यही कारण है कि शहर ग्रामों की अपेक्षा अधिक घने और बड़े क्षेत्र में बसे हुए होते हैं।

  • प्रारंभिक शहरीकरण की आवश्यक दशाएँ
  1. अत्यंत उत्पादक खेती – नि:संदेह अत्यंत उत्पादक खेती प्रारंभिक शहरीकरण की एक अत्यंत आवश्यक दशा थी। यह निर्विवाद है कि शहरीकरण तभी संभव हो सकता है जब खेती में इतनी उपज होती हो कि वह शहर में रहने वाले लोगों का पेट भरने में समर्थ हो सके। शहरों में लोग घनी बस्तियों में रहते हैं। अतः कहा जा सकता है कि जिस स्थान पर शहर का विकास होता है, उस स्थान पर ज़मीन का प्राकृतिक स्वरूप उपजाऊ होना अत्यंत आवश्यक है। उदाहरण के लिए, मेसोपोटामिया का शहर के रूप में विकास होना इसका प्रमाण है।

     

  2. जल-परिवहन – जल-परिवहन भी शहरीकरण के लिए अत्यंत उत्पादक खेती से कम आवश्यक दशा नहीं थी। प्रारंभिक काल में बोझा ढोने वाले पशुओं की पीठ पर लादकर व बैलगाड़ियों में भरकर शहरों में कृषि उत्पाद को ले जाना सरल नहीं था। इन माध्यमों से परिवहन में अत्यधिक समय लगता था। इनकी अपेक्षाकृत कांस्यकालीन सभ्यताओं में जल-परिवहन, खाद्यान्न एवं अन्य सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने का एक सस्ता एवं सुरक्षित साधन था। खाद्यान्न व अन्य सामान से भरी नौकाएँ नदी की धारा के साथ चलती थीं। परिणामतः उन पर कोई अतिरिक्त व्यय नहीं करना पड़ता था। प्राचीन मेसोपोटामिया की नहरें तथा प्राकृतिक जल-धाराएँ छोटी-बड़ी बस्तियों के बीच परिवहन के अच्छे साधनों के रूप में कार्य करती थीं। यही कारण था कि जल-परिवहन मेसोपोटामिया में प्रारंभिक शहरीकरण के विकास का एक महत्त्वपूर्ण कारक सिद्ध हुआ।

     

  3. धातु और पत्थर की कमी – धातु और पत्थर की कमी ने भी मेसोपोटामिया में प्रारंभिक शहरीकरण को बलदिया। नि:संदेह उन्नत व्यापार की अवस्था शहरीकरण का एक महत्त्वपूर्ण कारण है। इसके अतिरिक्त व्यापार के द्वारा ही नगरों में बनने वाला माल ग्रामों में पहुँचता है और ग्रामों से कच्चा माल तथा खाद्यान्न शहरों में आता है। मेसोपोटामिया खाद्य संसाधनों की दृष्टि से संपन्न थी, किंतु वहाँ खनिज पदार्थों की कमी थी। दक्षिणी मेसोपोटामिया के अधिकांश भागों में औज़ार, मोहरें और आभूषण आदि बनाने के लिए अच्छे पत्थरों तथा गाड़ियों के पहिए अथवा नावें बनाने के लिए अच्छी लकड़ी का अभाव था। इसी तरह औजार, बर्तन तथा आभूषण बनाने के लिए अच्छी धातु भी उपलब्ध नहीं थी। अतः ये वस्तुएँ व्यापार के द्वारा ही प्राप्त की जाती थीं। इसके साथ ही मेसोपोटामिया से कपड़ा और कृषि संबंधी उत्पादों को अन्य देशों के लिए निर्यात किए जाते थे। मेसोपोटामिया में अच्छी लकड़ी, ताँबा, राँगा, सोना, चाँदी, सीपी, विभिन्न प्रकार के पत्थर आदि तुर्की, ईरान तथा खाड़ी के अन्य देशों से आयात किए जाते थे।

  • शहर के विकास के फलस्वरूप उत्पन्न देशाएँ
  1. मुद्राओं का प्रयोग – शहरीकरण के विकास के कारण मुद्राओं के प्रचलन को बल मिला। नि:संदेह मुद्राओं के प्रचलन ने साहूकारों, विभिन्न व्यवसायियों, व्यापार तथा सरकार के काम को सरल बना दिया। हम जानते हैं कि प्राचीन काल में शहरों का लेन-देन अवैयक्तिक रूप से होता था। जिन लोगों से लेन-देन होता था, वे सामान्यतया एक-दूसरे से अपरिचित होते थे। अतः संदेशों, दस्तावेजों और सामान के गट्टरों को भेजते समय मुहर लगाना अनिवार्य समझा जाता था।

  2. श्रम-विभाजन – नगर जीवन और लोगों का एक स्थान पर बसना तभी संभव होता है, जब अनेक लोग विभिन्न गैर–खाद्यान्न उत्पादक रोजगारों; जैसे-धातुकर्म, मुहर, नक्काशी, प्रशासन, मंदिर सेवा आदि में लगे हों। शहर के विनिर्माताओं को अपने-अपने उद्योगों के लिए ईंधन, धातु, अनेक प्रकार के पत्थर की आवश्यकता होती है। इन चीजों को केवल एक स्थान से प्राप्त करना असंभव है। इसी प्रकार कोई एक व्यक्ति सभी प्रकार की वस्तुओं के निर्माण में कुशल नहीं हो सकता है। परिणामतः औद्योगिक एवं व्यापारिक विकास में श्रम-विभाजन का महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। वस्तुतः शहरीकरण की प्रक्रिया से श्रम-विभाजन को भी बल मिलता है।

  3. राजाओं की सैन्य-शक्ति जिसने श्रम को अनिवार्य बना दिया – शहरीकरण की प्रक्रिया ने राजाओं की सैन्य-शक्ति की आधारशिला रखी। हम जानते हैं कि शहरीकरण और औद्योगीकरण तथा व्यापारिक विकास में घनिष्ठ संबंध है। व्यापार के विकास के लिए शांति और सुरक्षा अति आवश्यक है जोकि किसी शक्तिशाली केंद्र द्वारा ही प्रदान की जा सकती है। परिणामतः शहरीकरण के साथ-साथ कानून-व्यवस्था की देखभाल तथा श्रम-विभाजन पर नियंत्रण अति आवश्यक हो गया। इसके फलस्वरूप राजा की सैन्य-शक्ति में भी वृद्धि होने लगी। उदाहरण के लिए, यदि मेसोपोटामिया को शहरीकरण हुआ तो वहाँ एक कुशल और शक्तिशाली केंद्र शासक का भी उदय हुआ।

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शहरीकरण का महत्त्व
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Chapter 2: लेखन कला और शहरी जीवन - अभ्यास [Page 48]

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NCERT History [Hindi] Class 11
Chapter 2 लेखन कला और शहरी जीवन
अभ्यास | Q 2. | Page 48
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