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यह कहना क्यों सही होगा कि खानाबदोश पशुचारक निश्चित रूप से शहरी जीवन के लिए खतरा थे? - History (इतिहास)

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Question

यह कहना क्यों सही होगा कि खानाबदोश पशुचारक निश्चित रूप से शहरी जीवन के लिए खतरा थे?

Long Answer

Solution

मेसोपोटामिया का इतिहास इस बात का गवाह है कि इसके पश्चिमी मरुस्थल से यायावर समूहों के कई झुंड इसके उपजाऊ एवं संपन्न मुख्य भूमि प्रदेश में आते रहते थे। ये पशुचारक गर्मी के मौसम में अपनी भेड़-बकरियों को इस उपजाऊ क्षेत्र के बोए हुए खेतों में ले जाते थे। अनेक बार ये यायावर समूह गड़रियों, फसल काटने वाले मजदूरों अथवा भाड़े के सैनिकों के रूप में इस उपजाऊ प्रदेश में आते थे और स्थायी रूप से इसे ही अपना निवास स्थान बना लेते थे। ये खानाबदोश, अक्कदी, एमोराइट, असीरियाई और आमीनियन जाति के लोग ही थे।

पशुचारक अपने पशुओं तथा उनके उत्पादों, जैसे-पनीर, चमड़ा, मांस आदि के बदले अनाज और धातु के औजार आदि लेते थे। बाड़े में रखे जाने वाले पशुओं के गोबर से बनी खाद भूमि को उपजाऊ बनाती थी, इसलिए यह खाद किसानों के लिए बहुत उपयोगी होती थी। किंतु यदा-कदा किसानों और पशुचारकों अथवा गड़रियों के बीच झगड़े भी हो जाते थे। प्रायः ऐसा होता था कि पशुचारक अपनी भेड़-बकरियों को पानी पिलाने के लिए बोए हुए खेतों के बीच से निकालकर ले जाते थे। परिणामतः किसानों की फसल को हानि पहुँचती थी। यहाँ तक कि कई बार खेतों में खड़ी फसल बरबाद हो जाती थी।

मारी के अभिलेखों से जाहिर होता है कि सिंचाई वाले क्षेत्रों में पशुचारकों के आगमन पर नज़र रखी जाती थी। नि:संदेह चरवाहे कभी उपयोगी साबित हो सकते थे तो कभी हानिकारक भी। यदि शहरी लोगों के साथ पशुचारकों का संबंध दोस्ताना नहीं होता तो वे आवागमन के प्रमुख रास्तों को भी हानि पहुँचा सकते थे। इसके अतिरिक्त, कभी-कभी खानाबदोश पशुचारक लूटमार की गतिविधियों में भी लिप्त हो जाते थे। यहाँ तक कि वे किसानों के गाँवों पर हमला कर देते थे और उनका इकट्ठा किया गया अनाज आदि लूटकर ले जाते थे।

उपलब्ध साक्ष्यों से यह भी जाहिर है कि ये यायावर पशुचारक घास के मैदानों में अथवा सड़क के किनारे तंबुओं में रहा करते थे। वे प्रायः राहजनी के कार्यों में लिप्त रहते थे। मारी राज्य में कृषक व पशुचारक दोनों निवास करते थे। फिर भी मारी नगर के राजा इन पशुचारक समूहों की गतिविधियों के प्रति अत्यधिक सावधान थे। पशुचारकों को राज्य में चलने-फिरने की तो अनुमति थी, किंतु उनकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाती थी। इस प्रकार मेसोपोटामिया का समाज और वहाँ की संस्कृति भिन्न-भिन्न समुदायों के लोगों व संस्कृतियों के लिए खुली थी। नि:संदेह, विभिन्न जातियों तथा समुदायों के लोगों के आपसी मेलजोल से वहाँ की सभ्यता में जीवन-शक्ति उत्पन्न हो गई थी।

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शहरी जीवन
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Chapter 2: लेखन कला और शहरी जीवन - अभ्यास [Page 48]

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NCERT History [Hindi] Class 11
Chapter 2 लेखन कला और शहरी जीवन
अभ्यास | Q 3. | Page 48
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