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Question
अपने कनिष्ठ महाविद्यालय में मनाए जाने वाले ‘हिंदी दिवस समारोह’ का सूत्र संचालन कीजिए ।
Solution
सूत्रसंचालन : दोस्तो! हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में आज महात्मा गांधी स्मारक इंटर कॉलेज, नाशिक में आयोजित इस समारोह में आपका हार्दिक स्वागत है। इस अवसर पर मुझे अपनी भाषा हिंदी से संबंधित कुछ पंक्तियाँ याद आती हैं -
जो थी तुलसी, चंद्र, सूर, भूषण को प्यारी।
थे रहीम, रसखान आदि जिस पर बलिहारी।
छवि ने जिसको लुभा लिया, जिसकी मनहारी।
सचमुच भाषा सकल राष्ट्र की वही हमारी।।
तो दोस्तो! हिंदी दिवस के इस अवसर पर अब बारहवीं कक्षा की छात्राओं द्वारा तैयार किया गया यह सुंदर नृत्य गीत प्रस्तुत है। आपके सामने यह नृत्य गीत प्रस्तुत कर रही हैं ऋचा, ऋधि, मधुरिमा, रोहा और अन्विता!
(कक्षा बारहवीं की लड़कियाँ -
जय माँ भारती जय, जय।
जय माँ भारती जय, जय।।
गीत गाते हुए नृत्य करती हैं।)
(तालियों की गड़गड़ाहट होती है।)
सूत्र संचालन : दोस्तो! तालियों की गड़गड़ाहट ही बता रही है कि यह नृत्य-गीत आप सबको कैसा लगा।
दोस्तो! अब हम आरंभ कर रहे हैं आज का मुख्य समारोह, यानी हिंदी दिवस का रंगारंग कार्यक्रम। मंच पर उपस्थित हैं हमारे कालेज के प्रिंसिपल श्री राजेंद्र पेंडसे जी, आज के प्रमुख अतिथि स्थानीय राणा प्रताप कालेज के हिंदी विभाग के अध्यक्ष श्री लोकनाथ सिन्हाजी तथा कालेज के अन्य अध्यापकगण।
सूत्र संचालन : अब हम महात्मा गांधी स्मारक इंटर कॉलेज के हिंदी विभाग के प्रभारी श्री श्रीपत मिश्र जी से प्रार्थना करते है कि आप हमारे प्रमुख अतिथि श्री लोकनाथ सिन्हाजी को पुष्पगुच्छ देकर उनका स्वागत करें। श्री श्रीपत जी मिश्र...
(श्री पतमिश्रप्रमुख अतिथि का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत करते है।तालियों की गड़गड़ाहट होती है।)
दोस्तो! अब हम अपने महात्मा गांधी स्मारक इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल श्री राजेंद्र पेंडसे जी की ओर से प्रमुख अतिथि श्री लोकनाथ सिन्हा जी से प्रार्थना करते हैं कि वे माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर उन्हें माल्यार्पण करें। श्रीमान लोकनाथ सिन्हा जी!
(लोकनाथ सिन्हाजी माँ सरस्वती के समक्ष रखे दीपदान के दीप प्रज्ज्वलित करते हैं। वे सरस्वती की मूर्ति को माला पहनाते हैं।तालियों की गड़गड़ाहट होती है।)
सूत्र संचालन : अब कालेज की ग्यारहवीं कक्षा की छात्राएँ सुनीता संघवी और जाह्नवी पांडेय देवी सरस्वती का वंदना गीत प्रस्तुत करेंगी...
(सुनीता और जाह्नवी माँ सरस्वती का वंदना गीत गाती हैं)
या कुन्देन्दु तुषार हार धवला, या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा। या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वंदिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा।।
(सरस्वती वंदना समाप्त होती है।)
(तालियों की गड़गड़ाहट होती है।)
सूत्र संचालन : अब कालेज के प्रिंसिपल श्री राजेंद्र पेंडसे जी हमारे प्रमुख अतिथि श्री आलोक नाथ सिन्हा जी का परिचय देंगे और कालेज की विभिन्न गतिविधियों से आप लोगों को परिचित कराएंगे। श्री राजेंद्र पेंडसे जी...
(श्री राजेंद्र पेंडसे प्रमुख अतिथि को समारोह का अतिथि पदस्वीकार करने के लिए बधाई देते हैंऔर संक्षेप में उनका परिचय देते हैं।)
(वे कालेज की गतिविधियों के बारे में बताते हैं।)
सूत्र संचालक : अब मैं प्रिंसिपल साहब राजेंद्र पेंडसे जी की ओर से प्रमुख अतिथि आलोक नाथ सिन्हा जी से प्रार्थना करूंगा कि वे हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता, हिंदी अंताक्षरी प्रतियोगिता तथा परीक्षाओं में प्रथम तथा द्वितीय स्थान पाने वाले विद्यार्थियों को अपने कर कमलों से पुरस्कार प्रदान करने की कृपा करें।
सूत्र संचालक : हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार विजेता जनार्दन शर्मा मंच पर आ जाएँ।
(प्रमुख अतिथि के हाथों जनार्दन शर्मा पुरस्कार लेते हैं। तालियाँ बजती हैं।)
सूत्र संचालक : अब वाद-विवाद प्रतियोगिता में द्वितीय पुरस्कार पाने वाले जयंत साठे मंच पर आ जाएँ।
(जयंत साठे सूत्र पुरस्कार लेते हैं। तालियाँ बजती हैं।)
सूत्र संचालक : अब हिंदी अंताक्षरी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पाने वाली स्नेहा पाण्डेय मंच पर आकर अपना पुरस्कार ग्रहण करें। स्नेहा पाण्डेय। (स्नेहा पाण्डेय प्रमुख अतिथि से पुरस्कार ग्रहण करती है।तालियाँ बजती हैं।)
सूत्र संचालक : अब में परीक्षाओं में प्रथम तथा द्वितीय स्थान पाने वाले विद्यार्थियों से आग्रह करता हूँ कि वे मंच पर आकर अपने-अपने पुरस्कार ग्रहण करें। मैं पुरस्कार विजेताओं को उनके नाम से बुलाऊँगा। सभी विजेता बारी-बारी से मंच पर आकर अपना अपना पुरस्कार प्राप्त करें।
कक्षा नौवीं : प्रथम पुरस्कार - राकेश शिंदे।
द्वितीय पुरस्कार - स्मिता सिंह।
कक्षा दसवीं : प्रथम पुरस्कार - ओंकार शर्मा।
द्वितीय पुरस्कार - रोहिणी दवे।
कक्षा ग्यारहवीं : प्रथम पुरस्कार - जतिन सेवक।
द्वितीय पुरस्कार - सचिन मेहरा।
(विजेता छात्र बारी-बारी से प्रमुख अतिथि से अपने-अपने पुरस्कार प्राप्त करते हैं।तालियाँ बजती हैं।)
सूत्र संचालन : अब कालेज के विज्ञान विभाग के प्रभारी श्री पवन राव 'हिंदी भाषा की विशेषता' के बारे में अपने विचार आपके सामने रखेंगे।
(पवन राव हिंदी भाषा के बारे में अपने विचार व्यक्त करते हैं।तालियाँ बजती हैं।)
सूत्र संचालन : अब हमारे कालेज के वाणिज्य विभाग के प्रभारी श्री अशोक शास्त्री जी हिंदी में संभावनाएँ' विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। आप लोग ध्यान से सुनिए।
(श्री अशोक शास्त्री अपने विचार व्यक्त करते हैं।तालियाँ बजती हैं।)
सूत्र संचालन : अब हमारे कालेज के हिंदी विभाग के प्रभारी श्रीपत मिश्र जी आपके समक्ष हिंदी भाषा में रोजगार की संभावनाओं के बारे में आपको बताएँगे। श्री श्रीपत मिश्र जी।
(श्री श्रीपत मिश्र अपना भाषण समाप्त करते हैं।तालियाँ बजती हैं।)
सूत्र संचालक : अब यहाँ उपस्थित सभी लोग उत्सुकतापूर्वक प्रतीक्षा कर रहे होंगे कि हमारे प्रमुख अतिथि राणा प्रताप कालेज के हिंदी विभाग के अध्यक्ष श्री आलोक नाथ सिन्हा जी हिंदी भाषा के बारे में अपने विचारों से हमें अवगत कराएँ। अब वे आपके समक्ष हैं।
(श्री लोकनाथ सिन्हा अपने विचार बताते हैं।तालियाँ बजती हैं।)
सूत्रसंचालन : दोस्तो! आज हमारी हिंदी भाषा के बारे में आप लोगों को काफी उपयोगी जानकारियाँ प्राप्त हुईं। और अब समय आ गया है कार्यक्रम की समाप्ति का।
अब कालेज के वाइस प्रिंसिपल श्री रंगनाथ दाते जी आज के हमारे प्रमुख अतिथि, अध्यापकों, विद्यार्थियों तथा उपस्थित जन समुदाय के प्रति आभार व्यक्त करेंगे।
(वाइस प्रिंसिपल श्री रंगनाथ दातेजी आभार व्यक्त करते हैं।)
(अंत में दोपहर १२:०० बजे राष्ट्रगान के साथ समारोह समाप्त हुआ)
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RELATED QUESTIONS
‘सूत्र संचालक केकारण कार्यक्रम मेंचार चाँद लगतेहैं’, इसेस्पष्ट कीजिए ।
निम्नलिखित का उत्तर लगभग १०० से १२० शबदों में लिखिए:
उत्तम मंच संचालक बनने के लिए आवश्यक गुण विस्तार से लिखिए।
सूत्र संचालन के विविध प्रकारों पर प्रकाश डालिए।
शहर के प्रसिद्ध संगीत महोत्सव का मंच संचालन कीजिए ।
निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:
मैं इस बात का ध्यान रखता हूँ कि कार्यक्रम कोई भी हो, मंच की गरिमा बनी रहे। मंचीय आयोजन में मंच पर आने वाला पहला व्यक्ति संचालक ही होता है। एंकर (उद्घोषक) का व्यक्तित्व दर्शकों की पहली नजर में ही सामने आता है। अतएव उसका परिधान, वेशभूषा, केश सज्जा इत्यादि सहज व गरिमामयी होनी चाहिए। उद्घोषक या एंकर के रूप में जब वह मंच पर होता है तो उसका व्यक्तित्व और उसका आत्मविश्वास ही उसके शब्दों में उतरकर श्रोता तक पहुँचता है। सतर्कता, सहजता और उत्साहवर्धन उसके मुख्य गुण हैं। मेरे कार्यक्रम का आरंभ जिज्ञासाभरा होता है। बीच-बीच में प्रसंगानुसार कोई रोचक दृष्टांत, शेर-ओ-शायरी या कविताओं के अंश का प्रयोग करता हूँ। जैसे- एक कार्यक्रम में वक्ता महिलाओं की तुलना गुलाब से करते हुए कह रहे थे कि महिलाएँ बोलती भी ज्यादा हैं और हँसती भी ज्यादा हैं। बिलकुल खिले गुलाबों की तरह वगैरह ...। जब उनका वक्तव्य खत्म हुआ तो मैंने उन्हें धन्यवाद देते हुए कहा कि सर आपने कहा कि महिलाएँ हँसती-बोलती बहुत ज्यादा हैं। |
(१) वाक्य पूर्ण कीजिए: (२)
- मंचीय आयोजन में मंच पर आने वाला पहला व्यक्ति ______।
- मेरे कार्यक्रम का आरंभ ______।
- मैं इस बात का ध्यान रखता हूँ कि कार्यक्रम कोई भी हो ______।
- एंकर (उद्घोषक) का व्यक्तित्व दर्शकों की ______।
(२) निम्नलिखित शब्दों के लिए परिच्छेद में आए हुए प्रत्यययुक्त शब्द लिखिए: (२)
- व्यक्ति - ______
- सहज - ______
- सतर्क - ______
- गरिमा - ______
(३) ‘व्यक्तित्व विकास में भाषा का महत्व’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)
किसी भी कार्यक्रम में मंच ______ की बहुत अहम भूमिका होती है।
कार्यक्रम में चार चाँद लगने का कारण ______।
शासकीय एवं राजनीतिक समारोह के सूत्र संचालन में इसका बहुत ध्यान रखना पड़ता है।
परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:
अच्छे मंच संचालक के लिए आवश्यक है - अच्छी तैयारी। वर्तमान समय में संगीत संध्या, बर्थ डे पार्टी या अन्य मंचीय कार्यक्रमों के लिए मंच संचालन आवश्यक हो गया है। मैंने भी इस तरह के अनेक कार्यक्रमों के लिए सूत्र संचालन किया है। जिस तरह का कार्यक्रम हो, तैयारी भी उसी के अनुसार करनी होती है। मैं भी सर्वप्रथम यह देखता हूँ कि कार्यक्रम का स्वरूप क्या है? सामाजिक, शैक्षिक, राजनीतिक, कवि सम्मेलन, मुशायरा या सांस्कृतिक कार्यक्रम! फिर उसी रूप में मैं कार्यक्रम का संहिता लेखन करता हूँ। इसके लिए कड़ी साधना व सतत प्रयास आवश्यक है। कार्यक्रम की सफलता सूत्र संचालक के हाथ में होती है। वह दो व्यक्तियों, दो घटनाओं के बीच कड़ी जोड़ने का काम करता है। इसलिए संचालक को चाहिए कि वह संचालन के लिए आवश्यक तत्त्वों का अध्ययन करे। सूत्र संचालक के लिए कुछ महत्त्वपूर्ण गुणों का होना आवश्यक है। हँसमुख, हाजिरजवाबी, विविध विषयों का ज्ञाता होने के साथ-साथ उसका भाषा पर प्रभुत्व होना आवश्यक है। कभी-कभी किसी कार्यक्रम में ऐन वक्त पर परिवर्तन होने की संभावना रहती है। यहाँ सूत्र संचालक के भाषा प्रभुत्व की परीक्षा होती है। पूर्व निर्धारित अतिथियों का न आना, यदि आ भी जाए तो उनकी दिनभर की कार्य व्यस्तता का विचार करते हुए कार्यक्रम पत्रिका में संशोधन/सुधार करना पड़ता है। आयोजकों की ओर से अचानक मिली सूचना के अनुसार संहिता में परिवर्तन कर संचालन करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाना ही सूत्र संचालक की विशेषता होती है। |
(१) संजाल पूर्ण कीजिए: (२)
(२) निम्नलिखित विधान ‘सत्य’ हैं या ‘असत्य’ लिखिए: (२)
- कार्यक्रम की सफलता वक्ता के हाथ में होती है।
- सूत्र संचालक दो व्यक्तियों, दो घटनाओं के बीच कड़ी जोड़ने का काम करता है।
- कार्यक्रम में ऐन वक्त पर परिवर्तन होने की संभावना कभी नहीं रहती।
- कार्यक्रम को सफल बनाना सूत्र संचालक की विशेषता होती है।
(३) ‘सूत्र संचालन रोजगार का उत्तम साधन है’, इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)
परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:
“सूत्र संचालन के मुख्यतः निम्न प्रकार हैं- शासकीय कार्यक्रम का सूत्र संचालन, दूरदर्शन हेतु सूत्र संचालन, रेडियो हेतु सूत्र संचालन, राजनीतिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सूत्र संचालन।"
शासकीय एवं राजनीतिक समारोह के सूत्र संचालन में प्रोटोकॉल का बहुत ध्यान रखना पड़ता है। पदों के अनुसार नामों की सूची बनानी पड़ती है।किसका-किसके हाथों सत्कार करना है; इसकी योजना बनानी पड़ती है। इस प्रकार का सूत्र संचालन करते समय अति अलंकारिक भाषा के प्रयोग से बचना चाहिए।
दूरदर्शन अथवा रेडियो पर प्रसारित किए जाने वाले कार्यक्रम/समारोह की संपूर्ण जानकारी होनी चाहिए। कार्यक्रम की संहिता लिखकर तैयार करनी चाहिए। उसके पश्चात् कार्यक्रम प्रारंभ करना चाहिए और धीरे-धीरे उसका विकास करते जाना चाहिए। भाषा का प्रयोग कार्यक्रम और प्रसंगानुसार किया जाना चाहिए। रोचकता और विभिन्न संदर्भ का समावेश कार्यक्रम में चार चाँद लगा देते हैं। स्मरण रहे-सूत्र संचालक मंच और श्रोताओं के बीच सेतु का कार्य करता है। सूत्र संचालन करते समय रोचकता, रंजकता, विविध प्रसंगों का उल्लेख करना आवश्यक होता है। कार्यक्रम/समारोह में निखार लाना सूत्र संचालक का महत्त्वपूर्ण कार्य होता है। कार्यक्रम के अनुसार सूत्र संचालक को अपनी भाषा और शैली में परिवर्तन करना चाहिए; जैसे गीतों अथवा मुशायरे का कार्यक्रम हो तो भावपूर्ण एवं सरल भाषा का प्रयोग अपेक्षित है तो व्याख्यान अथवा वैचारिक कार्यक्रम में संदर्भ के साथ सटीक शब्दों का प्रयोग आवश्यक है। सूत्र संचालन करते समय उसके सामने सुनने वाले कौन हैं; इसका भी ध्यान रखना चाहिए। |
- कृति पूर्ण कीजिए: [2]
सूत्र संचालन के मुख्य प्रकार:- ______
- ______
- ______
- ______
- गदयांश में से 'इक' प्रत्यय लगे हुए शब्द ढूँढ़कर लिखिए: [2]
- ______
- ______
- ______
- ______
- "किसी भी कार्यक्रम के लिए सूत्र संचालन आवश्यक होता है," इस विषय पर ४० से ५० शब्दों में अपने विचार लिखिए। [2]
लेखक आनंद सिंह जी ने ______ तक रेडियो उद्घोषक के रूप में सेवाएँ प्रदान कीं।