English

शहर केप्रसिद्ध संगीत महोत्सव का मंच संचालन कीजिए । - Hindi

Advertisements
Advertisements

Question

शहर के प्रसिद्ध संगीत महोत्सव का मंच संचालन कीजिए ।

Answer in Brief

Solution

मंच संचालन : भाइयो और बहनो! आज हमारे शहर कोल्हापुर में आयोजित प्रसिद्ध संगीत महोत्सव में आप सबका स्वागत है। और स्वागत है इस महत्त्वपूर्ण संगीत महोत्सव में अपने मधुर गीत-संगीत से श्रोताओं को सराबोर करने के लिए पधारे हुए संगीतकारों, गायक-गायिकाओं तथा उपस्थित जन-समुदाय का।

मंच संचालन : ...तो दोस्तो! प्रतीक्षा की घड़ियाँ समाप्त हुईं। अब आपके समक्ष मंच पर विराजमान हैं अपने साज-ओ-सामान के साथ शहर के प्रसिद्ध तबला वादक पंडित राधेश्याम जी। पंडित जी अपने तबला वादन के लिए पूरे जिले में विख्यात हैं। उनका साथ दे रही हैं शास्त्रीय गायिका शारदादेवी जी। पंडित जी के स्वागत में जोरदार तालियाँ...

(गायिका शारदादेवी के स्वरों के साथ पंडित राधेश्याम की उँगलियाँ तबले पर थिरकने लगती हैं।लोग वाह-वाह करते हैं।तालियों की गड़गड़ाहट से सभा गारगूँज उठता है।)

मंच संचालक : वाह भाई वाह! वाह वाह। पंडित जी ने वाकई अपनी वाद्य कला से श्रोताओं का मन मोह लिया। सभागार में गूंजती हुई तालियों का शोर इसका सबूत है।

मंच संचालन : दोस्तों! अब आप सुनेंगे अपनी चहेती लोकगीत गायिका राधा वर्मा को। वे आपको सावन माह की वर्षा की फुहारों के बीच गाए जाने वाले मधुर गीत कजरी के रस से सराबोर करेंगी। उनके साथ हारमोनियम पर हैं रामनाथ शर्मा जी और ढोलक पर हैं पंडित राधारमण त्रिपाठी जी।

 (राधा वर्माजी अपने कजरी गीत से समां बाँध देती हैं और लोग तालियाँ बजा कर 'वन्समोर... वन्समोर...' कहकर शोर मचाते हैं।)

मंच संचालक : दोस्तो! शांत रहिए... शांत! राधा जी आपके आग्रह का मान जरूर रखेंगी। राधा जी प्लीज! प्लीज!

राधा वर्मा दूसरी बार कजरी गाना शुरू करती हैं।अब श्रोता भी उनके स्वर से स्वर मिलाकर गाना शुरू कर देते हैं।)

मंच संचालक : वाह! वाह! दोस्तो, कजरी गीत है ही ऐसा। समूह में गाने पर इसका आनंद और ज्यादा, और ज्यादा बढ़ने लगता है। वाह भाई वाह!
मंच संचालक : अब मंच पर आपके समक्ष है प्रसिद्ध भजन गायक सुमित संत जी। संत जी की गायकी से तो आप सब परिचित ही हैं। अपने भजनों से संत जी आपको भक्ति रस से सराबोर कर देंगे। सुमित जी के साथ तबले पर हैं कामता प्रसाद जी। हारमोनियम पर हैं रामदास और सारंगी वादन कर रहे हैं प्रभु नारायण जी।

(सुमित संत पायो जी मैं ने राम रतन धन पायो' तथा 'मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई' जैसे भजनों से श्रोताओं को भक्तिरस से सराबोर कर देते हैं। तालियों और वाह! वाह के स्वर गूँजते हैं।)

मंच संचालक : वाह भाई! मेरे तो गिरधर गोपाल... (गुनगुनाते हैं) वाह! भक्ति रस का जवाब नहीं। आत्मा-परमात्मा का मिलन कराने वाला रस है भक्ति रस। वाह! वाह! वाह!
मंच संचालक : दोस्तो! अब आपको हम गजल गायकी की दुनिया में ले चलते हैं। मंच पर आपके सामने हैं प्रसिद्ध गजल गायक राजेंद्र शर्मा जी। गजल संभ्रांत श्रोताओं का गीत है। गजल के कई गायकों को अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त है। श्री राजेंद्र शर्मा जी...

(राजेंद्र शर्मा की गायकी पर श्रोता झूमते हैं। एक-एक शब्द पर दाद देते हैं। वाह-वाह के शब्द सुनाई देते हैं।राजेंद्र शर्मा अपना गायन समाप्त करते हैं। तालियों की गड़गड़ाहट होती हैं।)

मंच संचालन : दोस्तो! अब आप के समक्ष सितारवादक रमाशंकर जी तंत्रवाद्य सितार की मधुर ध्वनि से आपका मनोरंजन करने आ रहे है। सितारवादक रविशंकर का नाम तो आपने सुना ही होगा। अब सुनिए रमाशंकर जी को।

(सितार वादक रमाशंकर अपने सितार पर मधुर ध्वनि से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। तालियों की गडगडाहट होती है।)

मंच संचालक : दोस्तो! मृदंग के मधुर स्वर से तो आप परिचित ही होंगे। मृदंग मंदिरों में बजाया जाने वाला वाद्य हैं। इसके अलावा गाँवों में देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना में मृदंग वाद्य का प्रयोग होता है। तो सुनिए अब मृदंग के मधुर स्वर पंडित कमलाकांत शर्मा जी से।

(पंडित कमलाकांत अपने मृदंग पर ऐसी थपकियाँ देते हैं कि श्रोता वाह-वाह करने लगते हैं।)

मंच संचालक : दोस्तो! अब हम एक ऐसे वाद्य और उसे बजाने वाले व्यक्ति से आपका परिचय कराते हैं, जो वाद्य पुराने जमाने में लड़ाई के समय सैनिकों में उत्साह पैदा करने के लिए बजाया जाता था। लेकिन आजकल इसका प्रयोग गाँवों में नौटंकियों में किया जाता है। इसका नाम है नगाड़ा। आज इसे मंच पर बजा हैं पंडित श्याम नारायण जी। श्याम नारायण जी का पेशा ही है नौटंकियों में नगाड़ा बजाना। तो श्याम नारायण जी... कड़कड़... कड़कड़... धम्म!

 (श्याम नारायणजी नौटंकी की तर्जपर नगाड़ा बजाते हैं।श्रोता मस्ती से सिर हिलाते हैं।कुछ दर्शक अपने स्थान पर खड़े होकर नगाड़े की तर्ज पर अभिनय भी करने लगते हैं।श्याम नारायणजी नगाड़ा वादन बंद करते हैं। तालियों की गड़गड़ाहट होती हैं।)

मंच संचालन : दोस्तो! अब मैं आपके सामने आपका परिचय वाद्य यानी बाँसुरी बजाने वाले कलाकार को मंच पर अपने बाँसुरी वादन से आपका मनोरंजन करने के लिए बुलाता हूँ। दोस्तो! बाँसुरी की धून बहुत कर्णप्रिय होती है। भगवान श्री कृष्ण की बाँसुरी सुनकर गायें तक उनके पास दौड़ी चली आती थीं। तो शीतल यादव जी मंच पर अपनी बाँसुरी के साथ आपके सामने हैं।

(शीत लयादव बाँसुरी बजाते हैं।उनकी बांसुरी की धुन से पंडाल गूंजने लगता है। तालियाँ बजती हैं।)

मंच संचालक : दोस्तो! संगीत महोत्सव का कार्यक्रम हो और उसमें फिल्मी गीत-संगीत का समावेश न हो, ऐसा कैसे हो सकता है। दोस्तो! हम आज आपको फिल्मी गीतों के करावके संगीत की महफिल में ले चलते हैं। तो फिर देर किस बात की।...

(मंच पर करावके संगीत बजता है।इसमें सन  १९६० से लेकर सन १९८० तक के मधुर गीतों के मुखड़ों संगीत बजते हैं और गायक मधुर स्वर में इन गीतों को गाते हैं।)

मंच संचालक : दोस्तो! आपको पॉप संगीत का मजा दिलाए बिना भला हम कैसे जाने देंगे। ऐसी कल्पना भी मत कीजिए। तो हो जाए धम... धमा... धम...।

(मंच पर दिलदहला देने वाला पॉप संगीत बजता है।लोग इस संगीत के साथ नाचने लगते हैं।)

मंच संचालक : अरे भाई, हम तो भूल ही गए। हमारे बीच एक बहुत ही उदीयमान कलाकार कब से अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ये हैं बैंजो वादक मास्टर देवेश पांडेय जी। तो पांडेय जी, शुरू हो जाइए।

(देवांश पांडेजी अपने बैंजो वादक से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। चारों ओर से वाह-वाह का शोर होता हैं।)

मंच संचालक : अरे भाई, हमें पता है कि आप हमारे चहेते कलाकार पुत्तूचेरी पिल्लई को सुने बिना नहीं जाने वाले हैं। भाइयो! आखिर में आपके सामने श्रीमान पिल्लई साहब ही आ रहे हैं। आप तो जानते ही हैं कि वे -

प्यारा भारत देश हमारा।
हमको प्राणों से है प्यारा।

गीत हिंदी, मराठी, गुजराती, तमिल और तेलुगु भाषाओं में सुनाते हैं। आप यह देशभक्तिपूर्ण मधुर गीत सुनिए।

(श्री पिल्लई पाँच भाषाओं में यह गीत गाते हैं। तालियाँ बजती है।)
 (गीत समाप्त होता है।)

मंच संचालक : दोस्तो। इस गीत के साथ ही हमारा आज का संगीत महोत्सव का यह समारोह समाप्त होता है।
।। जय हिंद ।।

(राष्ट्रगान बजता है, परदा गिरता है।)

shaalaa.com
मैं उद्घोषक
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 16: मैं उद्घोषक - व्यावहारिक प्रयोग [Page 94]

APPEARS IN

Balbharati Hindi - Yuvakbharati 12 Standard HSC Maharashtra State Board
Chapter 16 मैं उद्घोषक
व्यावहारिक प्रयोग | Q 1 | Page 94

RELATED QUESTIONS

‘सूत्र संचालक केकारण कार्यक्रम मेंचार चाँद लगतेहैं’, इसेस्पष्ट कीजिए ।


निम्नलिखित का उत्तर लगभग १०० से १२० शबदों में लिखिए:

उत्तम मंच संचालक बनने के लिए आवश्यक गुण विस्तार से लिखिए।


सूत्र संचालन के विविध प्रकारों पर प्रकाश डालिए।


अपने कनिष्ठ महाविद्‌यालय में मनाए जाने वाले ‘हिंदी दिवस समारोह’ का सूत्र संचालन कीजिए ।


निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

मैं इस बात का ध्यान रखता हूँ कि कार्यक्रम कोई भी हो, मंच की गरिमा बनी रहे। मंचीय आयोजन में मंच पर आने वाला पहला व्यक्ति संचालक ही होता है। एंकर (उद्घोषक) का व्यक्तित्व दर्शकों की पहली नजर में ही सामने आता है। अतएव उसका परिधान, वेशभूषा, केश सज्जा इत्यादि सहज व गरिमामयी होनी चाहिए। उद्घोषक या एंकर के रूप में जब वह मंच पर होता है तो उसका व्यक्तित्व और उसका आत्मविश्वास ही उसके शब्दों में उतरकर श्रोता तक पहुँचता है। सतर्कता, सहजता और उत्साहवर्धन उसके मुख्य गुण हैं। मेरे कार्यक्रम का आरंभ जिज्ञासाभरा होता है। बीच-बीच में प्रसंगानुसार कोई रोचक दृष्टांत, शेर-ओ-शायरी या कविताओं के अंश का प्रयोग करता हूँ। जैसे- एक कार्यक्रम में वक्ता महिलाओं की तुलना गुलाब से करते हुए कह रहे थे कि महिलाएँ बोलती भी ज्यादा हैं और हँसती भी ज्यादा हैं। बिलकुल खिले गुलाबों की तरह वगैरह ...। जब उनका वक्तव्य खत्म हुआ तो मैंने उन्हें धन्यवाद देते हुए कहा कि सर आपने कहा कि महिलाएँ हँसती-बोलती बहुत ज्यादा हैं।

(१) वाक्य पूर्ण कीजिए: (२)

  1. मंचीय आयोजन में मंच पर आने वाला पहला व्यक्ति ______।
  2. मेरे कार्यक्रम का आरंभ ______।
  3. मैं इस बात का ध्यान रखता हूँ कि कार्यक्रम कोई भी हो ______।
  4. एंकर (उद्घोषक) का व्यक्तित्व दर्शकों की ______।

(२) निम्नलिखित शब्दों के लिए परिच्छेद में आए हुए प्रत्यययुक्त शब्द लिखिए: (२)

  1. व्यक्ति - ______
  2. सहज - ______
  3. सतर्क - ______
  4. गरिमा - ______

(३) ‘व्यक्तित्व विकास में भाषा का महत्व’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)


किसी भी कार्यक्रम में मंच ______ की बहुत अहम भूमिका होती है।


कार्यक्रम में चार चाँद लगने का कारण ______।


शासकीय एवं राजनीतिक समारोह के सूत्र संचालन में इसका बहुत ध्यान रखना पड़ता है।


परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

             अच्छे मंच संचालक के लिए आवश्यक है - अच्छी तैयारी। वर्तमान समय में संगीत संध्या, बर्थ डे पार्टी या अन्य मंचीय कार्यक्रमों के लिए मंच संचालन आवश्यक हो गया है। मैंने भी इस तरह के अनेक कार्यक्रमों के लिए सूत्र संचालन किया है। जिस तरह का कार्यक्रम हो, तैयारी भी उसी के अनुसार करनी होती है। मैं भी सर्वप्रथम यह देखता हूँ कि कार्यक्रम का स्वरूप क्या है? सामाजिक, शैक्षिक, राजनीतिक, कवि सम्मेलन, मुशायरा या सांस्कृतिक कार्यक्रम! फिर उसी रूप में मैं कार्यक्रम का संहिता लेखन करता हूँ। इसके लिए कड़ी साधना व सतत प्रयास आवश्यक है। कार्यक्रम की सफलता सूत्र संचालक के हाथ में होती है। वह दो व्यक्तियों, दो घटनाओं के बीच कड़ी जोड़ने का काम करता है। इसलिए संचालक को चाहिए कि वह संचालन के लिए आवश्यक तत्त्वों का अध्ययन करे। सूत्र संचालक के लिए कुछ महत्त्वपूर्ण गुणों का होना आवश्यक है। हँसमुख, हाजिरजवाबी, विविध विषयों का ज्ञाता होने के साथ-साथ उसका भाषा पर प्रभुत्व होना आवश्यक है। कभी-कभी किसी कार्यक्रम में ऐन वक्त पर परिवर्तन होने की संभावना रहती है। यहाँ सूत्र संचालक के भाषा प्रभुत्व की परीक्षा होती है। पूर्व निर्धारित अतिथियों का न आना, यदि आ भी जाए तो उनकी दिनभर की कार्य व्यस्तता का विचार करते हुए कार्यक्रम पत्रिका में संशोधन/सुधार करना पड़ता है। आयोजकों की ओर से अचानक मिली सूचना के अनुसार संहिता में परिवर्तन कर संचालन करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाना ही सूत्र संचालक की विशेषता होती है।

(१) संजाल पूर्ण कीजिए: (२)

(२) निम्नलिखित विधान ‘सत्य’ हैं या ‘असत्य’ लिखिए: (२)

  1. कार्यक्रम की सफलता वक्ता के हाथ में होती है।
  2. सूत्र संचालक दो व्यक्तियों, दो घटनाओं के बीच कड़ी जोड़ने का काम करता है।
  3. कार्यक्रम में ऐन वक्त पर परिवर्तन होने की संभावना कभी नहीं रहती।
  4. कार्यक्रम को सफल बनाना सूत्र संचालक की विशेषता होती है।

(३) ‘सूत्र संचालन रोजगार का उत्तम साधन है’, इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)


परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

“सूत्र संचालन के मुख्यतः निम्न प्रकार हैं- शासकीय कार्यक्रम का सूत्र संचालन, दूरदर्शन हेतु सूत्र संचालन, रेडियो हेतु सूत्र संचालन, राजनीतिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सूत्र संचालन।"

  • शासकीय एवं राजनीतिक कार्यक्रम का सूत्र संचालन:

शासकीय एवं राजनीतिक समारोह के सूत्र संचालन में प्रोटोकॉल का बहुत ध्यान रखना पड़ता है। पदों के अनुसार नामों की सूची बनानी पड़ती है।किसका-किसके हाथों सत्कार करना है; इसकी योजना बनानी पड़ती है। इस प्रकार का सूत्र संचालन करते समय अति अलंकारिक भाषा के प्रयोग से बचना चाहिए। 

  • दूरदर्शन तथा रेडियो कार्यक्रम का सूत्र संचालन:

दूरदर्शन अथवा रेडियो पर प्रसारित किए जाने वाले कार्यक्रम/समारोह की संपूर्ण जानकारी होनी चाहिए। कार्यक्रम की संहिता लिखकर तैयार करनी चाहिए। उसके पश्चात्‌ कार्यक्रम प्रारंभ करना चाहिए और धीरे-धीरे उसका विकास करते जाना चाहिए। भाषा का प्रयोग कार्यक्रम और प्रसंगानुसार किया जाना चाहिए। रोचकता और विभिन्‍न संदर्भ का समावेश कार्यक्रम में चार चाँद लगा देते हैं।

स्मरण रहे-सूत्र संचालक मंच और श्रोताओं के बीच सेतु का कार्य करता है। सूत्र संचालन करते समय रोचकता, रंजकता, विविध प्रसंगों का उल्लेख करना आवश्यक होता है। कार्यक्रम/समारोह में निखार लाना सूत्र संचालक का महत्त्वपूर्ण कार्य होता है। कार्यक्रम के अनुसार सूत्र संचालक को अपनी भाषा और शैली में परिवर्तन करना चाहिए; जैसे गीतों अथवा मुशायरे का कार्यक्रम हो तो भावपूर्ण एवं सरल भाषा का प्रयोग अपेक्षित है तो व्याख्यान अथवा वैचारिक कार्यक्रम में संदर्भ के साथ सटीक शब्दों का प्रयोग आवश्यक है। सूत्र संचालन करते समय उसके सामने सुनने वाले कौन हैं; इसका भी ध्यान रखना चाहिए।

  1. कृति पूर्ण कीजिए:      [2]
    सूत्र संचालन के मुख्य प्रकार:
    1. ______
    2. ______
    3. ______
    4. ______ 
  2. गदयांश में से 'इक' प्रत्यय लगे हुए शब्द ढूँढ़कर लिखिए:     [2]
    1. ______
    2. ______
    3. ______
    4. ______
  3. "किसी भी कार्यक्रम के लिए सूत्र संचालन आवश्यक होता है," इस विषय पर ४० से ५० शब्दों में अपने विचार लिखिए।       [2]

लेखक आनंद सिंह जी ने ______ तक रेडियो उद्घोषक के रूप में सेवाएँ प्रदान कीं।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×