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भाव व शिल्प सौंदर्य स्पष्ट कीजिए – "अंसुवन जल सींचि-सचि, प्रेम-बेलि बोयीअब त बेलि फैलि गई, आणंद-फल होयी" - Hindi (Core)

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Question

भाव व शिल्प सौंदर्य स्पष्ट कीजिए –

"अंसुवन जल सींचि-सचि, प्रेम-बेलि बोयी
अब त बेलि फैलि गई, आणंद-फल होयी"

Answer in Brief

Solution

भाव सौंदर्य  प्रस्तुत पंक्तियों में मीरा यह स्पष्ट कर रही हैं कि कृष्ण से प्रेम करने का मार्ग आसान नहीं है। इस प्रेम की बेल को सींचने, विकसित करने के लिए बहुत से कष्ट उठाने पड़ते हैं। वह कहती हैं कि इस बेल को उन्होंने आँसुओं से सींचा है। अब कृष्ण-प्रेमरूपी यह लता इतनी विकसित हो चुकी है कि इस पर आनंद के फल लग रहे हैं अर्थात् वे भक्ति-भाव में प्रसन्न हैं। सांसारिक दुख अब उनका कुछ भी नहीं बिगाड़ पाते।

शिल्प सौंदर्य – राजस्थानी मिश्रित व्रजभाषा में सुंदर अभिव्यक्ति है। साँगरूपक अलंकार का प्रयोग हैं; जैसे- प्रेमबेलि, आणंद फल, अंसुवन जल। ‘सींचि-सचि’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है। अनुप्रास अलंकार भी है- बेलि बोयी गेयता है।

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मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई
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Chapter 2.02: मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई, पग घुँघरू बाधि मीरां नाची - अभ्यास [Page 138]

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NCERT Hindi - Aaroh Class 11
Chapter 2.02 मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई, पग घुँघरू बाधि मीरां नाची
अभ्यास | Q 2. (क) | Page 138

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