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देहदान की संकल्‍पना स्‍पष्‍ट करते हुए उसका महत्व बताइए। - Hindi [हिंदी]

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Question

देहदान की संकल्‍पना स्‍पष्‍ट करते हुए उसका महत्व बताइए।

Answer in Brief

Solution

देहदान का अर्थ है 'देह का दान' अर्थात किसी उत्तम कार्य अपना जीवन ही दे देना। त्वचा मानव शरीर का एक ऐसा अभिन्न अंग है, जो न केवल शरीर को आवरण प्रदान करती है, बल्कि कवच की तरह उसे शारीरिक आपदाओं से भी बचाती है। समाज को कुशल चिकित्सक देने हेतु उसको मानव शरीर रचना का पूरा ज्ञान होना आवश्यक है, जो मृत शरीर पर परीक्षण द्वारा ही संभव है। इस हेतु देहदान अत्यन्त महत्वपूर्ण है। मृत मानव शरीर का उपयोग छात्रों को एनाटॉमी, शरीर की संरचना का अध्ययन और यह कैसे काम करता है, सिखाने के लिए किया जाता है। यह चिकित्सकों, सर्जनों, दंत चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों की शिक्षा में सबसे महत्वपूर्ण पाठ्यक्रमों में से एक है। हमारे देश की जनसंख्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है। बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए अस्पताल और डाक्टरों की भी आवश्यकता है। हमारे देश में पुरानी विचारधारा के लोग देह-दान पाप समझते हैं। उनकी दृष्टि में मानव का यह कार्य शास्त्र विरुद्ध है। भारत में हर साल लगभग 6 लाख लोग अंगों की कमी या अनुपलब्धता के कारण मर जाते हैं। पश्चिमी देश में अंग दान की दर संयुक्त राज्य अमेरिका में 36 मिलियन जितनी अधिक है, जबकि भारत में यह 0.3 मिलियन है जो बहुत कम है, किंतु धीरे-धीरे लोगों की धारणा बदल रही है। लोग अब अंग दान की तरह देहदान करने के लिए आगे आ रहे हैं। पिछले एक दशक से मृत्यु के पश्चात अपनी देह का दान करने में लोगों की रुचि बढ़ रही है।

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गोदान
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Chapter 2.03: गोदान - स्वाध्याय [Page 71]

APPEARS IN

Balbharati Hindi - Kumarbharati 9 Standard Maharashtra State Board
Chapter 2.03 गोदान
स्वाध्याय | Q (४) | Page 71

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संजाल पूर्ण कीजिए:


होरी की आँखों में वह हीरा था जो ______


होरी अँधेरे मुँह उठा तो देखता है कि ______


परिच्छेद में आए हुए शरीर के किसी एक अंग पर प्रयुक्‍त मुहावरा लिखिए।

‘हीरा तो जैसे संसार ही से चला गया।’

‘मेरा मन तो कहता है कि वह आवेगा, कभी-न-कभी जरूर।’

दोनों सोए। होरी अँधेरे मुँह उठा तो देखता है कि हीरा सामने खड़ा है, बाल बढ़े हुए, कपड़े तार-तार, मुहँ सूखा हुआ, देह में रक्त और मांस का नाम नहीं, जैसे कद भी छोटा हो गया है। दौड़कर होरी के कदमों में गिरा पड़ा।

होरी ने उसे छाती से लगाकर कहा- ‘‘तुम तो बिलकुल घुल गए हीरा! कब आए? आज तुम्हारी बार-बार याद आ रही थी। बीमार हो क्या?’’

आज उसकी आँखों में वह हीरा न था, जिसने उसकी जिंदगी तल्ख कर दी थी; बल्कि वह हीरा था, जो मॉं-बाप का छोटा-सा बालक था। बीच के ये पचीस-तीस साल जैसे मिट गए, उनका कोई चिह्न भी नहीं था।

हीरा ने कुछ जवाब न दिया। खड़ा रो रहा था।

होरी ने उसका हाथ पकड़कर गद्गद कंठ से कहा- ‘‘क्यों रोते हो भैया, आदमी से भूलचूक होती ही है। कहॉं रहा इतने दिन?’’


‘आदमी से भूलचूक होती ही है’, इसपर अपने विचार लिखिए।


‘होरी के जीवन में ‘परिवार और गाय’ दो ही शीर्षस्थ थे,’ सार्थकता स्पष्ट कीजिए।


सूचनानुसार कृतियाँ कीजिए:-


सूचनानुसार कृतियाँ कीजिए:-


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