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‘धन्यवाद’ शब्‍द की आत्‍मकथा अपने शब्‍दों में लिखिए। - Hindi - Composite [हिंदी - संयुक्त]

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Question

‘धन्यवाद’ शब्‍द की आत्‍मकथा अपने शब्‍दों में लिखिए।

Answer in Brief

Solution

धन्यवाद

अरे भाई साहब! उस व्यक्ति ने आपकी इतनी मदद की और आपने उसका आभार भी व्यक्त नहीं किया। अरे! चौकिए मत, मैं कोई भूत नहीं हूँ। एक अद्वितीय और महत्वपूर्ण शब्द जो हर कार्य, हर अनुभव, और हर संवेदना को सार्थक बना देता हूँ। मैं एक छोटा-सा शब्द हूँ, लेकिन मेरा महत्व अत्यधिक है। जब कोई अन्य व्यक्ति अपने दिल की गहराई से किसी अन्य को आभास करता है, जब उसे आदृश्य कुछ मिलता है या किसी ने उसकी मदद की होती है, तब मैं अपना असली रूप दिखाता हूँ। मनुष्य के जीवन का अभिन्न अंग जहाँ कोई किसी की सहायता करता है, वहाँ मैं अपने आप चला आता हूँ। कहते हैं, आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। मेरा जन्म भी इसी प्रकार हुआ था। मानव-समाज में जब शिष्टाचार की प्रथा चल पड़ी। मैं हर धन्यवाद के पीछे एक कहानी हूँ, एक आभास हूँ, जो दिल से निकलता है और दिल को छू जाता है। मैं उस व्यक्ति का शक्रिया हूँ, जो मेरे बनने में सहायक होता है, जिसने अपना समय और उत्साह साझा किया होता है। मेरे जन्म की कथा भी बड़ी रोचक है। मानव सभ्यता के विकास काल में मानव ने उत्तरोत्तर सभी क्षेत्रों में सफलताएँ प्राप्त की। मैं सच्चाई हूँ, निष्कलंक, और भावनाओं का एक संगम। मेरा उपयोग साधारित व्यक्तिगत और सामाजिक संबंधों में होता है, जब एक व्यक्ति अन्य की मदद के लिए आभास करता है। मेरी गहराईयों में, मैं एक सांगी हूँ जो हर समय सर्वोत्तम में बनता है, जब एक व्यक्ति अपने सर्वोत्तम को प्रकट करता है। मैं एक सहयोगी हूँ जो सफलता के क्षणों को और भी महत्वपूर्ण बना देता है। इस रूप में, मैं समाप्त होता हूँ, लेकिन हमेशा तैयार हूँ जब भी कोई मेरा उपयोग करना चाहता है - क्योंकि मैं हूँ, "धन्यवाद"।

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‘इत्‍यादि’ की आत्‍मकहानी
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Chapter 1.6: ‘इत्‍यादि’ की आत्‍मकहानी - स्वाध्याय [Page 15]

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Balbharati Hindi (Composite) - Lokvani Class 9 Maharashtra State Board
Chapter 1.6 ‘इत्‍यादि’ की आत्‍मकहानी
स्वाध्याय | Q १ | Page 15
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