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दिए गए संकेत-बिन्दुओं के आधार पर लगभग 100 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए: दैव-दैव आलसी पुकारा संकेत बिंदु: कथन का अर्थ, आलस्य सबसे बड़ा शत्रु, कर्म से ही सफलता - Hindi Course - B

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Question

दिए गए संकेत-बिन्दुओं के आधार पर लगभग 100 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए:

दैव-दैव आलसी पुकारा

संकेत बिंदु:

  • कथन का अर्थ
  • आलस्य सबसे बड़ा शत्रु
  • कर्म से ही सफलता
Writing Skills

Solution

दैव-दैव आलसी पुकारा

"दैव-दैव आलसी पुकारा" का अर्थ यह है कि आलसी व्यक्ति अपनी असफलताओं और कठिनाइयों के लिए हमेशा भाग्य को दोष देते हैं और स्वयं मेहनत करने से कतराते हैं। वे अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढने या अपने जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास नहीं करते, बल्कि हर स्थिति के लिए किस्मत को जिम्मेदार ठहराते हैं। यह कथन हमें इस सच्चाई की ओर संकेत करता है कि भाग्य केवल एक बहाना है, जिसे वे लोग अपनाते हैं जो कर्म करने में विश्वास नहीं रखते।

आलस्य मानव जीवन का सबसे बड़ा शत्रु है। यह एक ऐसी बुराई है, जो मनुष्य को न केवल उसकी सफलता से दूर करती है, बल्कि उसे मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर बना देती है। आलसी व्यक्ति समय का सदुपयोग नहीं करता और अपने जीवन की संभावनाओं को गंवा देता है। धीरे-धीरे आलस्य उसे इतना घेर लेता है कि वह अपने सपनों को साकार करने के लिए आवश्यक परिश्रम करने में असमर्थ हो जाता है। इस प्रकार, वह हमेशा दूसरों पर निर्भर हो जाता है और अपने जीवन में कभी आत्मनिर्भरता का अनुभव नहीं कर पाता।

सच्ची सफलता केवल कर्म से प्राप्त होती है। यह संसार कर्म का क्षेत्र है, और यहाँ परिश्रम करने वाले को ही फल मिलता है। भाग्य भी तभी हमारा साथ देता है, जब हम स्वयं अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पूरी मेहनत और लगन से प्रयास करते हैं। इतिहास गवाह है कि महान व्यक्तियों ने अपनी सफलता केवल अपने कठिन परिश्रम और कर्म के बल पर प्राप्त की है। वे कभी भी भाग्य का इंतजार नहीं करते, बल्कि अपने प्रयासों से अपनी किस्मत स्वयं बनाते हैं।

अतः हमें हमेशा कर्म में विश्वास करना चाहिए और आलस्य को दूर रखकर पूरी निष्ठा से अपने कार्यों में जुटे रहना चाहिए। सफलता अवश्य मिलेगी, क्योंकि परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं जाता।

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