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Question
दिव्यांग कविता के प्रकार की कोई कविता लिखिए।
Activity
Solution
मैं भी उड़ना चाहता हूँ
मैं भी उड़ना चाहता हूँ,
आसमान को छूना चाहता हूँ।
चाहे न हों मेरे पाँव सही,
पर सपनों में तो दौड़ना चाहता हूँ।
न आँखों ने देखे रंग कभी,
न हाथों से पकड़ी कलम सही,
पर मन में जो जोश है पल-पल,
उसे तो अब व्यक्त करना चाहता हूँ।
मत देखो मुझे दया की नज़र से,
मैं कमज़ोर नहीं, बस थोड़ा अलग हूँ।
जिसे तुम बोझ समझ बैठे हो,
मैं उसी को अवसर बना चाहता हूँ।
हौंसले मेरे भी बुलंद हैं,
हर मंज़िल मेरी नज़र में है।
जो देख न सकूँ तो क्या हुआ,
मेरे अंदर भी एक नज़र है।
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