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Question
'ईश्वर भक्ति में नामस्मरण का महत्व होता है', इस विषय पर अपना मंतव्य लिखिए।
Solution
ईश्वर भक्ति के अनेक मार्ग बताए गए हैं। उनमें सबसे सरल मार्ग ईश्वर का नाम स्मरण करना है। नाम स्मरण करने का कोई नियम नहीं है। भक्त जहाँ भी हो, चाहे जिस हालत में हो, ईश्वर का नाम स्मरण कर सकता है। अधिकांश लोग ईश्वर भक्ति का यही मार्ग अपनाते हैं। उठते-बैठते, आते-जाते तथा काम करते हुए नाम स्मरण किया जा सकता है। भजन - कीर्तन भी ईश्वर के नाम स्मरण का ही एक रूप है। ईश्वर भक्ति के इस मार्ग में प्रभु के गुणों का वर्णन किया जाता है। इसमें धार्मिक पूजा-स्थलों में जाने की जरूरत नहीं होती। गृहस्थ अपने घर में ईश्वर का नाम स्मरण कर उनके गुणों का बखान कर सकता है। इससे नाम स्मरण करने वालों को मानसिक शांति मिलती हैं और मन प्रसन्न होता है। कहा गया है - 'कलियुग केवल नाम अधारा, सुमिरि-सुमिर नर उतरें पारा।' इसमें ईश्वर भक्ति में नाम स्मरण का ही महत्त्व बताया गया है।
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संजाल पूर्ण कीजिए :
कृति पूर्ण कीजिए :-
'गुरु बिन ज्ञान न होई' उक्ति पर अपने विचार लिखिए ।
‘गुरुनिष्ठा और भक्तिभाव से ही मानव श्रेष्ठ बनता है’ इस कथन के आधार पर कविता का रसास्वादन कीजिए ।
गुरु नानक जी की रचनाओं के नाम लिखिए।
गुरु नानक जी की भाषाशैली की विशेषताएँ :
निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:
तेरी गति मिति तूहै जाणहि किआ को आखि वखाणै गगन मै थालु रवि चंदु दीपक बने। |
(१) कृति पूर्ण कीजिए: (२)
(२) उचित मिलान कीजिए: (२)
(१) | ईश्वर | काल |
(२) | आकाश | प्रभु |
(३) | समय | खोजता |
(४) | खोज | गगन |
(३) ‘विद्यार्थी जीवन में गुरु का महत्व’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)
निम्नलिखित पठित काव्यांश को पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतिया कीजिए:
नानक गुरु न चेतनी मनि आपणे सुचेत। छूते तिल बुआड़ जिक सुएं अंदर खेत ॥ खेते अंदर छुट्टयां कहु नानक सऊ नाह। 'फली अहि फूली अहि बपुड़े भी तन बिच स्वाहं॥१॥ जलि मोह घसि मसि करि, मति कागद करि सारु, भाइ कलम करिं चितु, लेखारि, गुरु पुछि लिखु बीचारि, लिखु नाम सालाह लिखु, |
1. संजाल पूर्ण कीजिए। (2)
2. निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए: (2)
- मति
- सुचेत
- लेखारि
- सऊ
3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए: (2)
'गुरु बिन ज्ञान न होइ' इस उक्ति पर अपना मत स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर 'गुरुबानी' कविता का रसास्वादन कीजिए:
- रचनाकर का नाम (१) -
- पसंद की पंक्तियाँ (१) -
- पसंद आने के कारण (२) -
- कविता की केंद्रीय कल्पना (२) -
निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:
जालि मोहु घसि मसि करि, मन रे अहिनिसि हरि गुण सारि। |
- (१) सहसंबंध लिखिए: [2]
(१) मोह को जलाकर और घिसकर बनाइए विरले (२) श्रेष्ठ कागज बनाना है, इससे प्रभु के दर्शन (३) संसार में हरि का नाम न भूलने वाले स्याही (४) जिसने प्रभु के नाम की माला जपी उसे मति - निम्नलिखित शब्दों के उपसिर्ग हटाकर पद्यांश में आए हुए मूलशब्द दूँढकर लिखिए: [2]
- सुमति - ______
- सदगुण - ______
- निर्जन - ______
- अहिंसा - ______
- "गुरु का महत्त्व" इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। [2]