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'एक संपार्शिवक प्रतिभूति के रूप में निर्गमित' ऋणपत्र का अर्थ बताइए। - Accountancy (लेखाशास्त्र)

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Question

'एक संपार्शिवक प्रतिभूति के रूप में निर्गमित' ऋणपत्र का अर्थ बताइए।

Answer in Brief

Solution

जब एक कंपनी बैंक अथवा वित्तीय संस्था से ऋण या अधिविकर्ष प्राप्त करती है तो ऐसी स्थिति में संपार्शिवक अ्रतिभूति को प्राथमिक प्रतिभूति की तुलना में सहायक अथवा अतिरिक्त प्रतिभूति के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसके लिए कंपनी अपनी कुछ परिसंपत्तियों को उपयुक्त ऋण प्राप्ति हेतु रक्षित ऋण के रूप में बंधक अथवा गिरवी रख सकती है। कितु ऋणदाता संस्थाएँ संपार्शिवक प्रतिभूति के रूप में अधिक परिसंपत्तियों के लिए आग्रह कर सकती हैं ताकि ऋण की राशि की पूर्णतः वसूली हो सके यदि प्राथमिक प्रतिभूति के विक्रय से ऋण की राशि का पूर्ण भुगतान संभव नहीं है तो ऐसी स्थिति में कंपनी स्वयं के ऋणपत्रों का निर्गमन पहले से बंधक परिसंपत्तियों सहित ऋणदाता को करती है। ऐसे निर्मम को 'संपार्शिवक प्रतिभूति' के रूप में ऋणपक्रों का निर्ममन कहते है।

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ॠणपत्रों का संपाश्विक प्रतिभूति के रूप में निर्गमन
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Chapter 2: ॠणपत्रों का निर्गम एवं मोचन - अभ्यास हेतु प्रश्न [Page 142]

APPEARS IN

NCERT Accountancy - Company Accounts and Analysis of Financial Statements [Hindi] Class 12
Chapter 2 ॠणपत्रों का निर्गम एवं मोचन
अभ्यास हेतु प्रश्न | Q 3. | Page 142
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