English

एक उदाहरण देते हुए निम्नलिखित प्रक्रम के सिद्धांत का संक्षिप्त विवरण दीजिए- क्रिस्टलन - Chemistry (रसायन विज्ञान)

Advertisements
Advertisements

Question

एक उदाहरण देते हुए निम्नलिखित प्रक्रम के सिद्धांत का संक्षिप्त विवरण दीजिए-

क्रिस्टलन

Answer in Brief

Solution

यह ठोस कार्बनिक पदार्थों के शोधन की प्रायः प्रयुक्त विधि है। यह विधि कार्बनिक यौगिक तथा अशुद्धि की किसी उपयुक्त विलायक में इनकी विलेयताओं में निहित अंतर पर आधारित होती है। अशुद्ध यौगिक को किसी ऐसे विलायक में घोलते हैं जिसमें यौगिक सामान्य ताप पर अल्प-विलेय (sparingly soluble) होता है, परंतु उच्चतर ताप परे यथेष्ट मात्रा में वह घुल जाता है। तत्पश्चात् विलयन को इतना सांद्रित करते हैं कि वह लगभग संतृप्त (saturate) हो जाए। विलयन को ठंडा करने पर शुद्ध पदार्थ क्रिस्टलित हो जाता है जिसे निस्यंद द्वारा पृथक् कर लेते हैं। निस्यंद (मातृ द्रव) में मुख्य रूप से अशुद्धियाँ तथा यौगिक की अल्प मात्रा रह जाती है। यदि यौगिक किसी एक विलायक में अत्यधिक विलेय तथा किसी अन्य विलायक में अल्प विलेय होता है, तब क्रिस्टलन उचित मात्रा में इन विलायकों को मिश्रित करके किया जाता है। सक्रियित काष्ठ कोयले (activated charcoal) की सहायता से रंगीन अशुद्धियाँ निकाली जाती हैं। यौगिक तथा अशुद्धियों की विलेयताओं में कम अंतर होने की दशा में बार-बार क्रिस्टलन द्वारा शुद्ध यौगिक प्राप्त किया जाता है।

shaalaa.com
कार्बनिक यौगिकों के शोधन की विधियाँ - क्रिस्टलन
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 12: कार्बनिक रसायन : कुछ आधारभूत सिद्धांत तथा तकनीकें - अभ्यास [Page 371]

APPEARS IN

NCERT Chemistry - Part 1 and 2 [Hindi] Class 11
Chapter 12 कार्बनिक रसायन : कुछ आधारभूत सिद्धांत तथा तकनीकें
अभ्यास | Q 12.18 (क) | Page 371
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×