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फ्राइड ने व्यक्तित्व की संरचना की व्याख्या कैसे की है? - Psychology (मनोविज्ञान)

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Question

फ्राइड ने व्यक्तित्व की संरचना की व्याख्या कैसे की है?

Answer in Brief

Solution

फ्राइड के अनुसार व्यक्तित्व के प्राथमिक संरचनात्मक तत्व तीन है इदम या इड, अंहा (ईगो) प्रह्म यह तत्व चेतना में ऊर्जा के रूप में होते है और इनके बारे में लोग द्वारा किए गए व्यवहार के तरीके से अनुमान लगाया जा सकता है

  1. इड - यह व्यक्ति की मूलप्रवृतिक ऊर्जा का स्रोत होता है इसका संबध व्यक्ति की आदिम आवश्यकताओ कामइच्छाओ और आक्रमक आवेगो की तात्कालिक तुष्टि से होता है यह सुखपसा - सिद्धांत पर कार्य करता है जिसका यह अभिग्रह होता है सुख की तलाश करते है और कष्ट का परिहार करते है फ्राइड के अनुसार मनुष्य की अधिकांश मूलप्रवृतिक ऊर्जा कामुक होता है और शेष ऊर्जा आक्रमक होती है इड को नैतिक मूल्यों, समाज और दूसरे लोगो की कोई परवाह नहीं होती है
  2. अह: इसका विकास इड से होता है और यह व्यक्ति की मूलप्रवृत्तक आवश्यकताओ की संतुष्टि वास्तविकता के घरातल पर करता है व्यक्तित्व की यह संरचना वास्तविकता सिध्दन्त से संचालित होती है और प्राय: इड को व्यवहार करने के उपयुक्त तरीको की तरफ निदिर्ष्ट करता है
  3. पराहम् - पराहम् को समझने का और इसकी विशेषता बताने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि इसको मानसिक प्रकार्यो की नैतिक शाखा के रूप में जाना जाए। पराहम् इड और अहं को बताता है की किसी विशिष्ट अवसर पर इच्छा विशेष की संतुष्टि नैतिक है अथवा नहीं। समाजीकरण की प्रक्रिया में पैतृक प्राधिकार के आंतरिकीकरण द्वारा पराहम् इड को नियंत्रित करने में सहायता प्रदान करता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई बालक आइसक्रीम देखकर उसे खाना चाहता है, तो वह इसके लिए अपनी माँ से पूछता है। उसका पराहम् संकेत देता है की उसका यह व्यवहार नैतिक द्द्ष्टि से सही है। इस तरह के व्यवहार के माध्यम से आइसक्रीम को प्राप्त करने पर बालक में कोई अपराध - बोध, भय अथवा दुश्चिता नहीं होगी।
    इस प्रकार व्यक्ति के प्रकार्यो के रूप में फ्रायड का विचार था की मनुष्य का अचेतन तीन प्रतिस्पर्धा शक्तियों अथवा ऊर्जाओं से निर्मित हुआ है। कुछ लोगो में इड पराहम् से अधिक प्रबल होता है तो कुछ अन्य लोगों में पराहम् इड से अधिक प्रबल होता है। इड, अहं और पराहम् की सापेक्ष शक्ति प्रत्येक व्यक्ति की स्थितिरता का निर्धारण करती है फ्रायड इड को दो प्रकार की मूलप्रवृत्तिक शक्तियो से ऊर्जा प्राप्त होती है जिन्हे जीवन - प्रवृति एवं मुमुर्षा या मृत्यु - प्रवृति के नाम से जाना जाता है।
    उन्होंने मृत्यु - प्रवृति के स्थान पर जीवन - प्रवृति को केंद्र में रखते हुए अधिक महत्व दिया है। मूलप्रवृति जीवन - शक्ति जो इड को ऊर्जा प्रदान करती है कामशक्ति या लिबिडो कहलाती है। लिबिडो सुखेप्सा - सिद्धांत के आधार पर कार्य करता है और तात्कालिक संतुष्टि चाहता है।
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Chapter 2: आत्म एवं व्यक्तित्व - समीक्षात्मक प्रश्न [Page 52]

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NCERT Psychology [Hindi] Class 12
Chapter 2 आत्म एवं व्यक्तित्व
समीक्षात्मक प्रश्न | Q 5. | Page 52
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