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व्यक्तित्व का विशेषक उपागम क्या है? यह कैसे प्रारूप उपागम से भिन्न है? - Psychology (मनोविज्ञान)

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Question

व्यक्तित्व का विशेषक उपागम क्या है? यह कैसे प्रारूप उपागम से भिन्न है?

Answer in Brief

Solution

प्रारूप उपागम व्यक्ति के प्रेक्षित व्यवहारपरक विशेषताओं की कुछ व्यापक स्वरूपों का परीक्षण कर मानव व्यक्तित्व को समझने का प्रयास करता है प्रत्येक व्यवहार पर एक स्वरूप व्यक्तित्व के किसी एक प्रकार का इंगित करता है जिसके अंतर्गत उस स्वस्य की विहारपरक विशेषता की समानता के आधार पर व्यक्तियों को रखा जाता है

प्राचीनकाल से ही लोगो को व्यक्तित्व के प्रारूपों में वर्गीकृत करने का प्रयास किया गया है ग्रीक चिकित्स्क हिप्पोक्रेट्स ने एक व्यक्तित्व का प्ररूप विज्ञान प्रस्ताविक किया जो फ्लेड और ह्यूमर पर आधारित है उन्होंने लोगो को चार प्रारूपो में वर्गीकृत किया है (जैसे - उत्साही, श्लेष्मिक, विवादों तथा कोपशील) भारत में भी एक प्रसिद्द आयुर्वेदिक ग्रन्थ चरक संहिता ने लोगो को वात, पित, एव कफ तीन वर्गों में तीन ह्यूमरल तत्वों जिन्हे त्रिदोष कहते है, के आधार पर वर्गीकृत किया है

जबकि विशेषक उपागम मुख्यत: व्यक्तितत्व के आधारभूत घटको के वर्णन अथवा विशेषीकरण से संबंधित होता है यह सिद्धांत व्यक्तित्व का निर्माण करने वाले मूल तत्व की खोज करते है मनुष्य व्यापक रूप से मनोवैज्ञानिक गुणों में भिन्नताओं का प्रदर्शन करते है फिर भी उनको व्यक्तित्व विश्लेषकों के लघु समूह में सम्मिलित किया सकता है विशेषक उपागम हमारे दैनिक जीवन के सामान्य अनुभव के बहुत नजदीक है उदाहरण के लिए जब हम यह जान लेते है की कोई व्यक्ति सामाजिक है तब हम यह मान लेते है की वह व्यक्ति ना केवल सहयोग मित्रता और सहायता करने वाला होगा बल्कि सामाजिक घटक से युक्त व्यवहार प्रदर्शित करने में भी प्रवृत होगा

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व्यक्तित्व के अध्ययन के प्रमुख उपागम
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Chapter 2: आत्म एवं व्यक्तित्व - समीक्षात्मक प्रश्न [Page 52]

APPEARS IN

NCERT Psychology [Hindi] Class 12
Chapter 2 आत्म एवं व्यक्तित्व
समीक्षात्मक प्रश्न | Q 4. | Page 52
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