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गांधी जी के तीनों बंदर आँख, कान, मुँह बंद करते थे किंतु उनका उद्देश्य अलग था कि वे बुरा न देखेंगे, न सुनेंगे, न बोलेंगे। - Hindi (Elective)

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Question

गांधी जी के तीनों बंदर आँख, कान, मुँह बंद करते थे किंतु उनका उद्देश्य अलग था कि वे बुरा न देखेंगे, न सुनेंगे, न बोलेंगे। यहाँ राजा ने अपने लाभ के लिए या राज्य की प्रगति के लिए ऐसा किया। दोनों की तुलना कीजिए।

Long Answer

Solution

गांधी जी के तीनों बंदरों का उद्देश्य बहुत ही अलग और शुद्ध है। वे आँख बंद किए रहते हैं ताकि बुराई को न देखें। बुराई को देखकर मनुष्य स्वयं बुराई करने के लिए प्रेरित होता है। अतः इस तरह बुराई की तरफ मनुष्य को जाने से रोका गया है। दूसरा बंदर बुराई न सुनने के लिए कहता है। दूसरे की बुराई सुनने वाला व्यक्ति अच्छा नहीं होता है। दूसरे की बुराई सुनकर उसके मन में भी बुराई आ सकती है। अतः उसे ऐसा करने से रोका गया है। इसी तरह तीसरा बंदर मुँह बंदर करके बताना चाहता है कि हम बुराई नहीं बोलेंगे। इस तरह बुराई को मुँह से नहीं निकालने के लिए प्रेरित किया गया है। इस तरह मनुष्य को पवित्रता की ओर बढ़ाया गया है। राजा द्वारा प्रजा की आँखें बंद करवाना, कानों में सीसा डलवाना तथा मुँह को सिलवा देना प्रतीक है कि प्रजा को इस कार्य के लिए दबाव बनाया जा रहा है। यह कार्य प्रजा अपनी स्वेच्छा से और अपनी प्रगति के लिए नहीं कर रही है। यह राजा द्वारा उन्हें बहकाकर या जबरदस्ती करवाया जा रहा है। इसमें प्रजा का नुकसान है। उसकी खुशहाली और प्रगति की बातें मात्र झूठ और धोखा है। अतः दोनों में बहुत अंतर है।
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असगर वजाहत
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Chapter 2.06: असगर वजाहत (शेर, पहचान, चार हाथ. साझा) - प्रश्न-अभ्यास [Page 132]

APPEARS IN

NCERT Hindi - Antara Class 12
Chapter 2.06 असगर वजाहत (शेर, पहचान, चार हाथ. साझा)
प्रश्न-अभ्यास | Q 1. | Page 132
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